302 लोग मसीह को एक साधारण मनुष्य मानते हैं

1 सभी मनुष्य यीशु के सच्चे रूप को देखने और उसके साथ रहने की इच्छा करते हैं। एक भी भाई-बहन ऐसा नहीं कहेगा कि वह यीशु को देखने या उसके साथ रहने की इच्छा नहीं करता। यीशु को देखने से पहले अर्थात, देहधारी परमेश्वर को देखने से पहले, संभवत: तुम लोगों के भीतर अनेक तरह के विचार होंगे, उदाहरण के लिए, यीशु के रूप के बारे में, उसके बोलने के तरीके, उसकी जीवन-शैली के बारे में इत्यादि। लेकिन एक बार उसे वास्तव में देख लेने के बाद तुम्हारे विचार तेजी से बदल जाएँगे।

2 यह सच है कि मनुष्य की सोच को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि मसीह का सार इंसान द्वारा किए गए किसी भी परिवर्तन को सहन नहीं करता। तुम लोग मसीह को अविनाशी या एक संत मानते हो, लेकिन कोई भी उसे दिव्य सार धारी सामान्य मनुष्य नहीं मानता है। इसलिए, ऐसे बहुत-से लोग जो दिन-रात परमेश्वर को देखने की कामना करते हैं, वास्तव में परमेश्वर के शत्रु हैं और परमेश्वर के अनुरूप नहीं हैं। क्या यह मनुष्य की ओर से की गई गलती नहीं है? अतीत, वर्तमान और भविष्य में ऐसे बहुत-से लोग जो मसीह के सम्पर्क में आए, वे असफल हो गए हैं और असफल हो जाएँगे; वे सभी फरीसियों की भूमिका निभाते हैं। तुम लोगों की असफलता का कारण यह है कि तुम्हारी धारणाओं में एक ऐसा परमेश्वर है जो बहुत ऊंचा और विराट है और प्रशंसा के योग्य है।

3 परन्तु सत्य वह नहीं होता जो मनुष्य चाहता है। न केवल मसीह ऊँचा और विराट नहीं है, बल्कि वह विशेष रूप से छोटा है; वह न केवल मनुष्य है बल्कि वह एक सामान्य मनुष्य है; वह न केवल स्वर्ग में आरोहित नहीं हो सकता, बल्कि वह पृथ्वी पर भी स्वतन्त्रता से नहीं घूम सकता। इसीलिए लोग उसके साथ सामान्य मनुष्य जैसा व्यवहार करते हैं; जब वे उसके साथ होते हैं तो उसके साथ बेतकल्लुफ़ी भरा व्यवहार करते हैं, और उसके साथ लापरवाही से बात करते हैं, और तब भी पूरे समय "सच्चे मसीह" के आने का इन्तज़ार करते रहते हैं। जो मसीह पहले ही आ चुका है उसे तुम लोग एक साधारण मनुष्य समझते हो और उसके वचनों को भी एक साधारण मनुष्य के शब्द मानते हो। इसलिए, तुमने मसीह से कुछ भी प्राप्त नहीं किया है, बल्कि अपनी कुरूपता को ही प्रकाश में पूरी तरह से उजागर कर दिया है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'वे सभी जो मसीह से असंगत हैं निश्चित ही परमेश्वर के विरोधी हैं' से रूपांतरित

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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