228 अतीत मुझे तलवार की तरह बेधता है

1 अतीत में प्रभु में अपने विश्वास के बारे में सोचते हुए, मैंने जो किया उसके लिए मुझे पश्चाताप होता है। मुझे अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य की अपनी अस्वीकृति से घृणा हो गई, सदा मुझे इसका पछतावा रहेगा। मैंने हर दिन प्रभु की वापसी का सपना देखा, मैंने पूरे दिल से स्वर्गिक राज्य में आरोहित किए जाने की कामना की। लेकिन जब प्रभु ने आकर दरवाज़े पर दस्तक दी और अंत-समय का उद्धार प्रकट हुआ, तो मैंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यह सोचकर कि परमेश्वर पर विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है, मैंने परमेश्वर को बाइबल तक सीमंकित कर दिया। मैंने प्रलाप किया, दिल लगाकर खोज करने के बजाय मनमाने ढंग से परमेश्वर के कार्य की आलोचना की। मैंने विश्वासियों को वास्तविक तरीके से खोज करने और जाँच करने से रोकने के लिए कलीसिया को बंद करने का काम किया। अपने नाम और रुतबे को बनाए रखने के लिए मैंने विश्वासियों को अपने चंगुल में कर लिया। मैंने कभी नहीं सोचा कि मैं इतने बरसों में परमेश्वर की सेवा कर सकता था, ऐसा करने के बजाय मैं विरोध करने वाला सरगना बन गया। मेरे ये पाप धुल नहीं सकते और मुझे बेपनाह पीड़ा देते हैं।

2 मैं बहुत विद्रोही और प्रतिरोधी था, लेकिन परमेश्वर ने फिर भी मुझ पर दया दिखाई और मुझे बचाने की हर संभव कोशिश की। उसने अपने वचनों से मेरे दिल के दरवाजे पर न जाने कितनी बार दस्तक दी, तब कहीं जाकर मेरा पत्थर दिल पसीजा। मैंने परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना को स्वीकार कर लिया है, मैंने देख लिया है कि मैं कितना मूर्ख और अंधा हूँ। परमेश्वर के स्वरूप की विपुलता को इंसान कभी भी पूरी तरह से नहीं समझ सकता। परमेश्वर का काम किन्हीं नियमों से नहीं बँधा है, यह हमेशा आगे बढ़ रहा है। लेकिन मैंने बाइबल के वचनों से परमेश्वर के काम को सीमांकित किया, मैं बहुत ही ज़्यादा अहंकारी हूँ। मेरे व्यवधान के कारण कितने ही विश्वासियों ने अपने उद्धार के अवसर गँवा दिए। परमेश्वर में विश्वास रखते हुए भी, मैंने रुतबे के लिए उससे झगड़ा किया, मैं वास्तव में एक आधुनिक फ़रीसी था। मुझे अपने कृत्यों के लिए शापित किया जाना चाहिए, लेकिन परमेश्वर ने फिर भी मुझे पश्चाताप करने का मौका दिया। परमेश्वर के सच्चे प्यार को देखते हुए, मुझे लगता है कि मैं उसका बहुत ऋणी हूँ ।

हे परमेश्वर, मैंने तुझ में विश्वास तो रखा, लेकिन तुझे कभी जाना नहीं, मैंने तेरा विरोध किया, तेरी आलोचना की। मैं वास्तव में शैतान की तरह हूँ, मैं तेरी दया और उद्धार के योग्य नहीं हूँ। हे परमेश्वर, मैं पश्चाताप करूंगा और तेरे न्याय को स्वीकार करूँगा। मैं अपने सर्वस्व के साथ सत्य का अनुसरण करूँगा, अपना कर्तव्य पूरा करूँगा और तेरे प्रेम का प्रतिदान दूँगा।

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