988 परमेश्वर में विश्वास करना पर जीवन को हासिल न करना, दंड का कारण बनता है

1 हो सकता है तुम ने अपने समय में अत्यधिक पीड़ा सही हो, परन्तु तुम अभी भी कुछ नहीं समझते; तुम जीवन की प्रत्येक बात के विषय में अज्ञानी हो। यद्यपि तुम्हें ताड़ना दी गई और तुम्हारा न्याय किया गया; तुम बिलकुल भी नहीं बदले और तुम ने भीतर तक जीवन ग्रहण ही नहीं किया। जब तुम्हारे कार्य को जाँचने का समय आता है, तुम अग्नि जैसे भयंकर परीक्षण और उस से भी अधिक क्लेश को अनुभव करोगे। यह अग्नि तुम्हारे सम्पूर्ण अस्तित्व को राख में बदल देगी। ऐसे व्यक्ति के समान, जिसके पास जीवन नहीं है, ऐसा व्यक्ति जिसके भीतर एक रत्ती भी शुद्ध स्वर्ण नहीं है, एक ऐसा व्यक्ति जो अभी भी पुराने भ्रष्ट स्वभाव में फंसा हुआ है, और ऐसा व्यक्ति जो विषमता होने का काम भी अच्छे से नहीं कर सकता, तो तुम्हें क्यों निकाला नहीं जा सकता?

2 किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जीतने वाले कार्य का क्या उपयोग, जिसका मूल्य एक पैसे से भी कम है और जिसके पास जीवन नहीं है? जब वह समय आएगा, तो तुम सब के दिन नूह और सदोम के समय से अधिक कठिन होंगे! तब तुम्हारी प्रार्थनाएँ भी तुम्हारे लिए कुछ भला नहीं करेंगी। एक बार जब उद्धार का कार्य समाप्त हो गया, तुम पश्चाताप करना पुनः कैसे आरम्भ कर सकते हो? एक बार जब उद्धार का सम्पूर्ण कार्य कर लिया गया, तो उद्धार का और कार्य नहीं होगा। जो होगा, वह मात्र बुराई को दण्ड देने के कार्य का आरम्भ होगा। तुम विरोध करते हो, तुम विद्रोह करते हो, और तुम वे बातें करते हो, जो तुम जानते हो कि बुरी हैं। तो क्या तुम कठोर दण्ड के लक्ष्य नहीं हो?

3 मैं आज यह तुम्हारे लिए बोल रहा हूँ। यदि तुम अनसुना करना चुनते हो, तो जब वह विपत्ति बाद में तुम पर पड़ती है, यदि तुम तब विश्वास और पछतावा करना आरम्भ करोगे, तो क्या इसमें तब बहुत देर नहीं हो गई होगी? मैं आज तुम्हारे पिछले उल्लंघन स्मरण नहीं रखता हूँ; मैं तुम्हें बार-बार क्षमा करता हूँ, मात्र तुम्हारे सकारात्मक पक्ष को देखने के लिए मैं तुम्हारे नकारात्मक पक्ष को अनदेखा करता हूँ, क्योंकि मेरे समस्त वर्तमान वचन और कार्य तुम्हें बचाने के लिए हैं, और तुम्हारे प्रति मैं कोई बुरा इरादा नहीं रखता हूँ। फिर भी तुम प्रवेश करने से इन्कार करते हो; तुम भले से बुरा नहीं बता सकते और नहीं जानते कि दयालुता की प्रशंसा कैसे की जाती है। क्या इस प्रकार का व्यक्ति उस दण्ड और उस धर्मी प्रतिफल की प्रतीक्षा नहीं कर रहा है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "विजयी कार्यों का आंतरिक सत्य (1)" से रूपांतरित

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