354 किसी को भी सक्रिय रूप से परमेश्वर को समझने की परवाह नहीं

1

जब ईश्वर होता है परेशान, वह सामना करता है मानवजाति का

जो उसकी तरफ़ बिलकुल ध्यान नहीं देती,

जो उसका अनुसरण, उससे प्रेम का दावा,

लेकिन उसके भाव की उपेक्षा करती है।

कैसे उसका दिल न दुखे?

यहाँ तक कि जो बनना चाहते हैं विश्वासपात्र ईश्वर के,

वे नहीं जाना चाहते उसके निकट, जानना या उसके दिल का रखना ख़याल।

परमेश्वर अकेला है!

सिर्फ़ इसलिए नहीं क्योंकि भ्रष्ट मानवजाति उसका विरोध करती है,

पर वे जो आध्यात्मिक होना चाहते हैं, वे जो ईश्वर को जानना चाहते हैं,

वे भी जो ईश्वर को जीवन देना चाहते हैं, नहीं समझते उसके विचारों को।

वे नहीं जानते उसका स्वभाव या उसकी भावनाओं को।

ओह, परमेश्वर अकेला है, परमेश्वर अकेला है।

2

परमेश्वर के प्रबंधन कार्य में, वह निष्ठा से कार्य करता और बोलता है,

और बिन रोक के सामना करता है, उसके अनुयायी उसके प्रति अवरुद्ध हैं।

कोई नहीं चाहता पास आना, समझना उसका दिल या उसकी भावना।

यहाँ तक कि जो बनना चाहते हैं विश्वासपात्र ईश्वर के,

वे नहीं जाना चाहते उसके निकट, जानना या उसके दिल का रखना ख़याल।

परमेश्वर अकेला है!

सिर्फ़ इसलिए नहीं क्योंकि भ्रष्ट मानवजाति उसका विरोध करती है,

पर वे जो आध्यात्मिक होना चाहते हैं, वे जो ईश्वर को जानना चाहते हैं,

वे भी जो ईश्वर को जीवन देना चाहते हैं, नहीं समझते उसके विचारों को।

वे नहीं जानते उसका स्वभाव या उसकी भावनाओं को।

ओह, परमेश्वर अकेला है, परमेश्वर अकेला है।

3

जब ईश्वर आनंदित है, कोई नहीं बाँटता उसकी ख़ुशी।

जब ग़लत समझा जाता है, उसे दिलासा नहीं देता कोई।

उसका दिल जब दुखता है भीतर से,

कोई उसके दिल की आवाज़ सुनना नहीं चाहता।

हज़ारों सालों के प्रबंधन कार्य के दौरान,

कोई नहीं समझता भावनाएँ ईश्वर की,

न कोई सराहता या उसके साथ खड़ा रहता है

उसका आनन्द और दुख बाँटने को।

यहाँ तक कि जो बनना चाहते हैं विश्वासपात्र ईश्वर के,

वे नहीं जाना चाहते उसके निकट, जानना या उसके दिल का रखना ख़याल।

परमेश्वर अकेला है!

सिर्फ़ इसलिए नहीं क्योंकि भ्रष्ट मानवजाति उसका विरोध करती है,

पर वे जो आध्यात्मिक होना चाहते हैं, वे जो ईश्वर को जानना चाहते हैं,

वे भी जो ईश्वर को जीवन देना चाहते हैं, नहीं समझते उसके विचारों को।

वे नहीं जानते उसका स्वभाव या उसकी भावनाओं को।

ओह, परमेश्वर अकेला है, परमेश्वर अकेला है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I' से रूपांतरित

पिछला: 353 कहाँ है ईश्वर से तुम्हारी अनुकूलता का प्रमाण?

अगला: 355 बदले में क्या दिया है तुमने परमेश्वर को

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन परमेश्वर का आगमन हो चुका है, वह राजा है सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें