355 बदले में क्या दिया है तुमने परमेश्वर को

1

कितने ही पतझड़ और वसंत के मौसम में, संग रहा है तुम्हारे परमेश्वर।

अरसे तक साथ रहा है तुम्हारे परमेश्वर।

गुज़रे कितने दुष्कर्म तुम्हारे, उसकी आँखों के आगे से?

दिल को छू लेने वाले शब्द तुम्हारे, गूँजें कानों में परमेश्वर के।

गिनी नहीं जा सकती, उसकी वेदी पर रखी लाखों ख़्वाहिशें तुम्हारी।

फिर भी उसकी वेदी पर न समर्पण, न सच्चाई रखते हो तुम लेशमात्र भी।

हैं कहाँ पर फल तुम्हारी आस्था के? हैं कहाँ पर फल तुम्हारी आस्था के?

2

वही आहार अर्पित करते तुम उसको, जो दिया परमेश्वर ने तुमको,

कहते हो अर्पित किया तुमने जो कुछ है पास तुम्हारे,

इनाम अपनी मेहनत का बताते हो इसे।

कैसे ख़बर नहीं है तुमको, जो कुछ अर्पित करते हो तुम परमेश्वर को,

सारा योगदान तुम्हारा, वही तो है जो चुराया तुमने उसकी वेदी से।

अब वो अर्पित करते हो तुम परमेश्वर को।

क्या दग़ा नहीं है ये परमेश्वर से?

लेता वो आनंद उसका जो है उसकी वेदी पर,

न कि मेहनत के प्रतिफल का, जो तुम देते हो उसको।

3

परमेश्वर से दग़ा की तुम सचमुच जुर्रत करते हो,

तो फिर कैसे माफ़ी दे वो तुमको?

कैसे अब वो सहन कर सकता इसको?

दे दी है हर चीज़ तुमको उसने।

खोल दी हर चीज़ तुम्हारी ख़ातिर उसने।

ज़रूरत की हर चीज़ मुहैया करा दी उसने,

और आँख भी खोल दी तुम्हारी उसने।

मगर अनदेखा कर अपने ज़मीर को,

दग़ा देते हो तुम परमेश्वर को, परमेश्वर को।

पाया है तुमने अनंत अनुग्रह परमेश्वर का,

देखें हैं तुमने स्वर्गिक रहस्य परमेश्वर के।

दिखाई है ज्वाला स्वर्ग की तुम्हें परमेश्वर ने,

मगर नहीं है दिल उसका ऐसा कि जला दे तुमको।

कितना लौटाया तुमने परमेश्वर को?

कितना दिया तुमने ख़ुशी से परमेश्वर को?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'तुम सभी कितने नीच चरित्र के हो!' से रूपांतरित

पिछला: 354 किसी को भी सक्रिय रूप से परमेश्वर को समझने की परवाह नहीं

अगला: 356 परमेश्वर के हृदय को कौन समझ सकता है?

2022 के लिए एक खास तोहफा—प्रभु के आगमन का स्वागत करने और आपदाओं के दौरान परमेश्वर की सुरक्षा पाने का मौका। क्या आप अपने परिवार के साथ यह विशेष आशीष पाना चाहते हैं?

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें