206 अब मैं कभी परमेश्वर से दूर नहीं जाऊँगी

1

मैं कभी पैसे और प्रसिद्धि के पीछे भागती थी, मैं परमेश्वर को छोड़कर दुनिया में वापस चली गई।

मैं अंधेरे में जा गिरी, मैं बेचैन और असहज थी।

जब परमेश्वर मेरे साथ न था, तो मेरा एकमात्र साथी दर्द था।

हे परमेश्वर, मैंने तेरे वचनों पर ध्यान नहीं दिया यह मेरी गलती है, मैंने शैतान को गले लगाने पर ज़ोर दिया।

मैंने अपनी आस्था त्याग दी, तुझे बेहद आहत किया। मैं अपने दिल को खोजती हूँ—मेरा ज़मीर कहाँ है?

शैतान के अधिकार-क्षेत्र में रहकर मैंने अपने अंदर बहुत कड़वाहट भर ली, मैं तेरे साथ रहने की ख़ुशी के लिये तरसती हूँ।

कितनी चाहत है मेरी कि मैं वक्त को पीछे ले जाऊँ, फिर से नई शुरुआत कर सकूँ।

क्या मेरे बचाए जाने का कोई अवसर है? क्या वापस लौटने के लिये बहुत देर हो चुकी है?


2

परमेश्वर की कठोर ताड़ना और अनुशासन के ज़रिये, मैंने आखिरकार खुद को देखा है।

मैं केवल अपने शब्दों से परमेश्वर को स्वीकारती हूँ, लेकिन मैंने उससे कभी परमेश्वर की तरह व्यवहार नहीं किया।

मेरे मन में उसके प्रति ज़रा-सी भी श्रद्धा नहीं रही, मैंने बिल्कुल अनजाने में उसके स्वभाव का अपमान किया है।

हे परमेश्वर, सत्य का अनुसरण किए बिना, मैं तुझे कैसे जान पाती या कैसे तेरा भय मान पाती?

कल मैंने तेरे साथ ऐसा विश्वासघात किया जिसका ख्याल आता है तो लगता है जैसे किसी ने मेरे सीने में ख़ंजर भोंक दिया हो।

मैं इतना बड़ा कर्ज़ नहीं चुका सकती, पश्चाताप और आत्म-तिरस्कार मेरे दिल को मथ रहे हैं।

मैं तेरे सामने साष्टांग दंडवत करती हूँ, अपनी आत्मा को तेरे समक्ष खोलती हूँ, अचानक मेरी आँखों की कोर से आँसू छलक पड़ते हैं।

मेरी कठोरता और विद्रोह ने तेरे दिल को कितना आहत किया है, मैं अतीत की कड़वी बातों को कैसे मिटाऊँ?


3

मैं केवल परमेश्वर की दया के कारण ही उसके घर लौटकर आई हूँ।

यह उसका निस्वार्थ उद्धार ही है जिसने मुझे पश्चाताप करने का अवसर दिया है।

मैंने परमेश्वर के सच्चे प्यार का अनुभव किया है, मैंने खुद को नया बनाने का संकल्प लिया है।

हे परमेश्वर, जब मैं तेरी शरण में लौटती हूँ तो देखती हूँ कि तू मेरी ओर देखकर मुस्करा रहा है।

तेरा मनोहर रूप मेरे दिल को घेर लेता है, तू बहुत ही प्रिय और मनभावन है, बिल्कुल वैसा ही जैसा पहली बार देखा था।

तू इतना खरा, इतना सच्चा है, ये बात मेरे दिल को खींचती है, तेरे प्रति श्रद्धा उमड़ती है।

हे परमेश्वर, तू जीवन में मेरे लिये सर्वस्व है, अब मैं कभी तुझसे दूर नहीं जाऊंगी।

हे परमेश्वर, तू जीवन में मेरे लिये सर्वस्व है, अब मैं कभी तुझसे दूर नहीं जाऊंगी।

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