914 सभी चीज़ें हैं प्रकटीकरण सृष्टिकर्ता के अधिकार का

1

इस नये जहाँ में, मानवता से भी पहले, सृष्टिकर्ता ने बनाया सांझ-सवेरा।

आकाश, धरती और सागर बनाये, और बनाये घास-फूस, पेड़-पौधे सारे।

दिन और साल, मौसम और प्रकाश बनाये उसने

उस नये जीवन के लिए, जो थे जल्द ही रचे जाने वाले।

सृष्टिकर्ता द्वारा रची गयी हर नई चीज़,

थी उसके अधिकार और सामर्थ्य की अभिव्यक्ति।

उसका हर विचार, हर कथन,

उसके सामर्थ्य का हर प्रकटीकरण, बेजोड़ नमूना है

सभी चीज़ों में, ये एक महान कार्य है,

मानवजाति के ज्ञान और समझ के सबसे योग्य है।


2

उसके वचन और सम्पादन का समय था एक ही,

नहीं था उनके बीच कोई अंतराल या विसंगति।

सभी नई चीज़ों का प्रकटन और जन्म हैं सबूत सृष्टिकर्ता के अधिकार के।

उसका वचन है सच्चा, वो होगा ज़रूर पूरा।

जो किया गया सम्पन्न रहेगा वो सदा सर्वदा।

ये तथ्य बदला नहीं, कल से आज तक।

और इसलिए, रहेगा ये ऐसा ही सदा सर्वदा।

उसका हर विचार, हर कथन,

उसके सामर्थ्य का हर प्रकटीकरण, बेजोड़ नमूना है

सभी चीज़ों में, ये एक महान कार्य है,

मानवजाति के ज्ञान और समझ के सबसे योग्य है।


3

सृष्टिकर्ता का सामर्थ्य और अधिकार, निरंतर करते रहते चमत्कार।

परमेश्वर खींचता इन्सान का ध्यान, उसके कर्म पर उनकी नजरें हैं गड़ी,

जो है अचरज भरा और है उसके अधिकार के प्रयोग से।

उसका अद्भुत सामर्थ्य देता आनंद ही आनंद।

इन्सान हैं चकित, अति आनन्दित, ख़ुशी से चहकते हैं।

वे हैं द्रवित, विस्मय से भरे, वे आनंद से उछलते हैं।

इन्सान के अंदर आदर और श्रद्धा जन्मती है।

उसका हर विचार, हर कथन,

उसके सामर्थ्य का हर प्रकटीकरण, बेजोड़ नमूना है

सभी चीज़ों में, ये एक महान कार्य है,

मानवजाति के ज्ञान और समझ के सबसे योग्य है।

सृष्टिकर्ता का अधिकार और उसके कर्म इन्सान के दिल को आंदोलित करते हैं।

सृष्टिकर्ता का अधिकार और उसके कर्म इन्सान के दिल को शुद्ध करते हैं।

सृष्टिकर्ता का अधिकार और उसके कर्म इन्सान के दिल को तुष्ट करते हैं।


—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I से रूपांतरित

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