360 क्या तुम लोग सचमुच परमेश्वर के वचनों में जीते हो?

पलक झपकते ही आ गया आज का दिन।

मेरे आत्मा के मार्गदर्शन में,

रहता है हर इंसान मेरी रोशनी में।

कोई गुज़रे कल की सोचता नहीं।


कौन है जो न रहा वर्तमान में,

या न गुज़ारे शानदार महीने

और दिन रहकर राज्य में?

कौन है जो न रहा सूरज के तले?

हालाँकि आ चुका है राज्य इंसान के बीच,

कोई सच में ना जाने इसका स्नेह।

इंसान सिर्फ इसे देखता है बाहर से,

वो जानता नहीं इसके सार।

क्या तुम लोग सच में मेरी रोशनी में रहते हो?

क्या तुम लोग सच में मेरे वचनों में जीते हो?

कौन अपने भविष्य पर नहीं सोचता?

कौन अपने नसीब से दुखी नहीं होता?

कौन दर्द के समंदर में संघर्ष नहीं करता?

आज़ादी कौन नहीं चाहता?

क्या इंसान को राज्य के आशीष

उसकी मेहनत के बदले मिले हैं?

क्या पूरी हो सकती इंसान की सारी ख़्वाहिशें?


जब मेरा राज्य बने

तो कौन आनंदित न होता?

क्या देश बच सकते हैं?

क्या बड़ा लाल अजगर मक्कारी कर के बच सकता है?


मेरी आज्ञाएँ कायनात में सुनी जाती हैं,

लागू होती पूरी कायनात में।

इंसानों में प्रकट होता मेरा अधिकार।

फिर भी सचमुच कभी जाना नहीं इंसान ने।

प्रकट होती हैं मेरी आज्ञाएँ

जब मेरा काम पूर्णता के करीब हो।

लोगों पर जब मेरा राज होगा स्वयं ईश्वर माना जाऊँगा,

तो मेरा राज्य पूर्णता से धरती पर आएगा।

क्या तुम लोग सच में मेरी रोशनी में रहते हो?

क्या तुम लोग सच में मेरे वचनों में जीते हो?

कौन अपने भविष्य पर नहीं सोचता?

कौन अपने नसीब से दुखी नहीं होता?

कौन दर्द के समंदर में संघर्ष नहीं करता?

आज़ादी कौन नहीं चाहता?

क्या इंसान को राज्य के आशीष

उसकी मेहनत के बदले मिले हैं?

क्या पूरी हो सकती इंसान की सारी ख़्वाहिशें?

आज नयी राह पर

शुरुआत करता हर इंसान,

शुरू कर दिया उसने नया जीवन,

फिर भी सचमुच किसी ने धरती पे

स्वर्ग-जैसा जीवन नहीं जिया है।

क्या तुम लोग सच में मेरी रोशनी में रहते हो?

क्या तुम लोग सच में मेरे वचनों में जीते हो?

कौन अपने भविष्य पर नहीं सोचता?

कौन अपने नसीब से दुखी नहीं होता?

कौन दर्द के समंदर में संघर्ष नहीं करता?

आज़ादी कौन नहीं चाहता?

क्या इंसान को राज्य के आशीष

उसकी मेहनत के बदले मिले हैं?

क्या पूरी हो सकती इंसान की सारी ख़्वाहिशें?


"वचन देह में प्रकट होता है" से रूपांतरित

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