715 यही एक वास्तविक इंसान के समान होना है

1 परमेश्वर में अपने विश्वास में, तुम सत्य को समझने के काबिल बन सको इससे पहले तुम्हें उसके अधिक से अधिक वचनों को पढ़ना होगा। सिर्फ़ सत्य को समझकर ही तुम स्वयं को जान सकते हो, अपने अंदर के भ्रष्ट स्वभावों के बारे में समझ सकते हो और तुम्हें इसका स्पष्ट अंदाज़ा होगा। सत्य का अभ्यास करने और परमेश्वर के समक्ष रहने के लिए, तुम्हें अपनी देह की इच्छाओं को भूलना होगा और अपनी पसंद की चीज़ों, अपनी इच्छाओं और अपने शैतानी स्वभावों के ख़िलाफ़ एक युद्ध छेड़ना होगा। अगर लोग सही मायनों में अपने शैतानी स्वभावों से घृणा करते हैं और देह के सुखों से सचमुच घृणा करते हैं, तो वे सत्य के अनुसार निरंतर अभ्यास कर सकते हैं और उनके कर्म सिद्धांतों के अनुरूप होंगे, उनमें एक गुंजाइश होगी और सीमाएं होंगी; ये ऐसे प्रभाव हैं जो सत्य को समझकर हासिल किये जाते हैं। अगर वे सत्य को नहीं समझते हैं, तो हमेशा देह की इच्छाओं से बंधे और उनके द्वारा शासित होंगे, उनके पास आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं होगा।

2 जब लोग उस दिन तक अनुभव करते हैं जब तक जीवन के बारे में उनका दृष्टिकोण और उनके अस्तित्व का अर्थ एवं आधार पूरी तरह से बदल नहीं जाते हैं, जब उनका सब कुछ परिवर्तित नहीं हो जाता और वे कोई अन्य व्यक्ति नहीं बन जाते हैं, क्या यह अद्भुत नहीं है? यह एक बड़ा परिवर्तन है; यह एक ऐसा परिवर्तन है जो सब कुछ उलट-पुलट कर देता है। केवल जब दुनिया की कीर्ति, लाभ, पद, धन, सुख, सत्ता और महिमा में तुम्हारी रुचि ख़त्म हो जाती है और तुम आसानी से उन्हें छोड़ पाते हो, केवल तभी तुम एक मनुष्य के समान बन पाओगे। जो लोग अंततः पूर्ण किये जाएंगे, वे इस तरह के एक समूह होंगे। वे सत्य के लिए, परमेश्वर के लिए और धार्मिकता के लिए जीएँगे। यही एक मनुष्य के समान होना है।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'समझना ही होगा कि लोगों की प्रकृतियों में समानताएँ भी हैं और भिन्नताएँ भी' से रूपांतरित

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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