439 परमेश्वर को अपने हृदय में आने दो

दिल खोलोगे अपना, तभी आएगा ईश्वर दिल में।

तभी तुम उसका स्वरूप देख सको,

तभी तुम उसकी इच्छा देख सको जब वो आए तुम्हारे दिल में।

तो खोलो अपना दिल! खोलो अपना दिल!

1

तुम उस समय जानोगे ईश्वर की हर चीज़ कीमती है,

उसका स्वरूप संजोने योग्य है।

उसकी तुलना में, इंसान, चीज़ें, तुम्हारे जीवन की घटनाएँ,

और तुम्हारे प्रियजन, किसी महत्व के नहीं हैं।

देखोगे तुम वो तुच्छ और मामूली हैं।

बाकी हर चीज़ बेकार होगी तुम्हारे लिए,

न खींचेगी तुम्हें, न उसका कोई मूल्य होगा।

सिर्फ़ ईश्वर, आकर्षित करेगा तुम्हें।

दिल खोलोगे अपना, तभी आएगा ईश्वर दिल में।

तभी तुम उसका स्वरूप देख सको,

तभी तुम उसकी इच्छा देख सको जब वो आए तुम्हारे दिल में।

तो खोलो अपना दिल! खोलो अपना दिल!

2

ईश्वर की दीनता में देखोगे तुम उसकी प्रभुता और महानता।

छोटी-छोटी चीज़ों में भी देखोगे उसकी अनंत सहनशीलता और बुद्धिमत्ता

देखोगे अपने बारे में उसकी समझ, सहिष्णुता, धीरता।

इससे तुम्हारे अंदर उसके लिए प्रेम जागेगा!

उस दिन तुम्हें लगेगा, तुम रहते मलिन दुनिया में कि तुम्हारे जीवन की घटनाएँ,

तुम्हारे प्रियजन, उनका प्यार, उनकी सुरक्षा, सरोकार, किसी के कोई मायने नहीं।

ईश्वर ही प्रिय है तुम्हारा, उसी को सहेजो तुम।

दिल खोलोगे अपना, तभी आएगा ईश्वर दिल में।

तभी तुम उसका स्वरूप देख सको,

तभी तुम उसकी इच्छा देख सको जब आए वो तुम्हारे दिल में।

तो खोलो अपना दिल! खोलो अपना दिल!

3

ईश-प्रेम कितना महान है उसका सार कितना पवित्र है।

उसके प्रेम में कपट, बुराई, कलह, जलन नहीं

है तो केवल धार्मिकता और प्रामाणिकता।

इंसान को प्रयास और कामना करनी चाहिए ईश्वर के स्वरूप के लिए।

दिल खोलोगे अपना, तभी आएगा ईश्वर दिल में।

तभी तुम उसका स्वरूप देख सको,

तभी तुम उसकी इच्छा देख सको जब वो आए तुम्हारे दिल में।

तो खोलो अपना दिल! खोलो अपना दिल!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III' से रूपांतरित

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