139 हे परमेश्वर, क्या आप जानते हैं कि मैं आपके लिए कितना लालायित हूँ?

1

मेरे दिल में आपके लिए लालसा है, मैं आपके लौटने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

आपका चेहरा देखे बिना, मेरा दिल बहुत चिंतित रहता है।

रात इतनी लम्बी और अँधेरी है, मैं कब प्रकाश को देखूँगा?

मैं शीघ्र ही आपसे दुबारा मिलने की उत्कट प्रतीक्षा में हूँ।

हे परमेश्वर! आप जानते हैं कि मैं आपके लौटने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

मैं आपसे याचना करता हूँ कि कृपया मुझे न छोड़ें, मैं आपके बिना नहीं रह सकता।

2

आपकी आवाज़ सुनकर, मेरा हृदय प्रसन्न होता है।

मैं आपके साथ भोज में शामिल होता हूँ, मैं आपके वचनों का स्वाद लेता हूँ।

मैं सब कुछ अर्पित कर देने का शांति से निर्णय लेता हूँ।

केवल आपकी इच्छा पूरी करने के लिए मैं आपके वचनों का प्रसार करता हूँ और उनकी गवाही देता हूँ।

हे परमेश्वर! काश आप मेरे प्रेम की प्रतीक्षा करें।

आपको संतुष्ट करने के लिए मैं अपना हृदय और अपना मन समर्पित करता हूँ, मैं आपके बिना नहीं रह सकता।

3

आपके न्याय से गुज़रते हुए, पीड़ा और उदासी होती है।

हालाँकि देह दुर्बल है, मैं आपको भूला नहीं हूँ।

मैं देहासक्ति का तिरस्कार करता हूँ, और शैतान से और भी अधिक घृणा करता हूँ।

मैं न्याय को सहर्ष स्वीकार करता हूँ, ताकि शीघ्र ही भ्रष्टता से छुटकारा पा सकूँ।

आपके दिल की इच्छा पूरी किये बिना मुझे मृत्यु अस्वीकार्य है।

जब मैं आपकी मुस्कराहट को देख सकूँगा, तब मैं बहुत संतोष का अनुभव करूँगा।

4

आपके वचनों का साथ मुझे विश्वास और बल देता है।

आगे से मैं अब नकारात्मक न बनूँगा, मैं सचमुच आपसे प्रेम करता हूँ।

मैंने परीक्षणों में बहुत पीड़ा सही है, मेरी भ्रष्टता को शुद्ध किया गया है।

चाहे मैं कितनी भी कठिनाइयों का सामना करूँ, मैं आपसे प्रेम करूँगा और आपकी गवाही दूँगा।

आपका अनुमोदन पाकर, मैं एक नया व्यक्ति बनने की आशा करता हूँ।

कभी भी आपसे दूर हुए बिना, आपको शुद्ध प्रेम अर्पित करना चाहता हूँ।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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