208 परमेश्वर का न्याय एक आशीष है

1 

हे परमेश्वर! तू इंसान का न्याय करने और उसे शुद्ध करने के लिए सत्य व्यक्त करता है, और अपना प्रेम प्रकट करता है, 

तुम्हारे वचन इंसान की प्रकर्ति का न्याय करते और उसे उझागर करते हैं; आखिरकार मैं देखता हूँ कि मैं कितना भ्रष्ट हूँ।

मैं उसका न्याय और शुद्धिकरण स्वीकारना चाहता हूँ ताकि मेरे शैतानी स्वभाव बदल जाएँ।

परीक्षण के कारण भले ही मुझे बहुत पीड़ा सहनी पड़ती है, तुम्हारे वचन हमेशा मेरे साथ रहते हैं और मुझे रास्ता दिखाते हैं।

कितनी ही बार जब मैंने स्वयं को कमज़ोर और नकारात्मक महसूस किया, तो तेरे वचनों ने मुझे आत्मविश्वास और शक्ति दी।

कितनी ही बार जब मैं नाकाम हुआ, लड़खड़ाया, तो तेरे वचनों ने मुझे फिर से उठाया। 

कितनी ही बार जब मैं अहंकारी और अवज्ञाकारी हुआ, तो तेरे वचनों ने मेरा न्याय किया और मेरे दिल को जगाया। 

अब जाकर मैंने देखा कि तेरे वचन बेहद कीमती हैं और वे मेरे जीवन का पोषण हैं।

2 

तू वचन व्यक्त करता है, इंसान को सत्य, मार्ग और जीवन प्रदान करता है।

तू इंसान का न्याय और उसे शुद्ध करता है, ताकि लोग जीवन पा सकें, यही तेरा आशीष है।

सत्य को समझकर और अपनी भ्रष्टता को दूर कर, हम प्रकाश में रहने योग्य हो पाते हैं।

तेरे वचनों पर भरोसा करते हुए, हम उत्पीड़न, कष्ट, परीक्षणों और शुद्धिकरण के दौरान मज़बूती से खड़े रहते हैं।

जब हम नाकाम होते हैं, लड़खड़ाते हैं, तो हम रोते हैं, लेकिन तेरे वचन दिलासा देते हैं और हमारा मार्गदर्शन करते हैं।

तेरा अनुसरण करते हुए, क्लेशों और परीक्षाओं से गुज़रत हुए हालाँकि हमने कष्ट सहा है, लेकिन हमने सत्य हासिल कर लिया है। 

हमारा स्वभाव थोड़ा बदल गया है, तेरी कृपा के कारण हम एक इंसान की तरह जीते हैं।

मैं तुम्हारे न्याय और ताड़ना के लिए आभारी हूँ जिसने मेरे भ्रष्ट स्वभावों को शुद्ध किया।

3 

तू सत्य, मार्ग और जीवन है, व्यवाहारिक परमेश्वर का देहधारण है।

तेरे वचन पूर्णत: सत्य हैं, वे हमारे जीवन की अनिवार्यता हैं।

तू हमें शुद्ध और पूर्ण करने के लिए हर कीमत चुकाता है।

तू दीन है, अदृश्य है, इंसानों के बीच रहकर कार्य करता है, इंसान के लिए तेरा प्रेम बहुत गहरा है। 

तेरा न्याय एक आशीष है, हमने गहराई से इसका अनुभव किया है।

हमने तेरे प्रेम का इतना आनंद लिया है कि हम कभी भी इसका प्रतिदान नहीं दे पाएँगे।

हालाँकि तेरा अनुसरण करने में दुख है, फिर भी हमने बहुत कुछ हासिल किया है।

हमने तुझसे सत्य और जीवन प्राप्त किया है, हम सदा तुझसे प्रेम करेंगे और तेरी गवाही देंगे।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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