85 वचन द्वारा न्याय बेहतर दर्शाये परमेश्वर का अधिकार

1

परमेश्वर के अंत के दिनों के काम में,

संकेतों-चमत्कारों से ज़्यादा शक्ति है वचन में।

वचन का अधिकार है बढ़कर उनसे।

ये इंसान के भ्रष्ट स्वभावों को दिखाए।

तुम ख़ुद नहीं पहचान सकते इन्हें।

वचन जब करेगा उजागर तुम्हारे आगे इन्हें,

तुम जान लोगे, नकारोगे नहीं इन्हें,

ये आश्वस्त कर देगा पूरी तरह तुम्हें।

क्या वचन का अधिकार नहीं है ये?

ये वो परिणाम है जो हासिल हुआ है

आज किए गए वचन के काम से।

यही है जो कर सकता हासिल ईश्वर का वचन।

दिखाए ये, ईश्वर का अधिकार, सामर्थ्य

महज़ संकेतों-चमत्कारों में नहीं है,

महज़ पिशाचों को भगाने में ही नहीं है।

दिखाता वचन का न्याय कहीं बेहतर ढंग से

ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता को, अधिकार को।

2

न्याय और ताड़ना के इस काम से,

देख पाएगा इंसान पूरी तरह से

अपने ही गंदे और भ्रष्ट सार को,

बदल जाएगा पूरी तरह, हो जाएगा शुद्ध वो।

इसी तरीके से काबिल बन सकता इंसान

ईश्वर के सिंहासन के सामने लौटने को।

वचन के न्याय और ताड़ना के ज़रिये ही

प्राप्त हो सकता है इंसान ईश्वर को।

वचन के न्याय के माध्यम से,

वचन के ज़रिये शुद्धिकरण, खुलासे से

इंसान की धारणाएँ, मंशाएँ, और उम्मीदें,

अशुद्धताएँ होतीं प्रकट, जो दिल में हैं।

दिखाए ये, ईश्वर का अधिकार, सामर्थ्य

महज़ संकेतों-चमत्कारों में नहीं है,

महज़ पिशाचों को भगाने में ही नहीं है।

दिखाता वचन का न्याय कहीं बेहतर ढंग से

ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता को, अधिकार को।

3

वचन से मिलते सारे फल तुम सबको,

ये हैं उनसे बड़े जो मिलते संकेतों-चमत्कारों से।

ईश्वर की महिमा, अधिकार, उसके सूली चढ़ने से,

बीमार को चंगा करने, पिशाचों को भगाने से

ज़्यादा दिखती है उसके वचनों के न्याय से।

दिखाए ये, ईश्वर का अधिकार, सामर्थ्य

महज़ संकेतों-चमत्कारों में नहीं है,

महज़ पिशाचों को भगाने में ही नहीं है।

दिखाता वचन का न्याय कहीं बेहतर ढंग से

ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता को, अधिकार को।

दिखाए ये, ईश्वर का अधिकार, सामर्थ्य

महज़ संकेतों-चमत्कारों में नहीं है,

महज़ पिशाचों को भगाने में ही नहीं है।

दिखाता वचन का न्याय कहीं बेहतर ढंग से

ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता को, अधिकार को।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देहधारण का रहस्य (4)' से रूपांतरित

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