68 कनान की धरती पर आनंद

I

लौटना घर परमेश्वर के,

देता है आनंद और जोश मुझे।

ख़ुशकिस्मत हूँ मैं,

देखा आख़िरकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर को मैंने,

राज्य के युग में प्रवेश करने के लिये,

करते अगुवाई लोगों की उनके वचन।

राह दिखाते मुझे उनके वचन,

समझती हूँ कौन-से मार्ग पर

चलना चाहिये मुझे।

मसीह का राज्य है धरती कनान की।

मधुर है प्रेम हमारा उनके लिये,

नचाता है ये प्रेम हमें आनंद से।

धरती पर कनान की,

अनंत काल तक आराधना करेंगे परमेश्वर-जन उनकी।

II

हो गया है साकार,

स्वर्ग के राज्य का सपना मेरा आख़िरकार,

खोजता/खोजती नहीं अब मैं।

सजीव जीवन-जल से,

सींचा है मुझे परमेश्वर ने।

देता है आनंद रूबरू होना उनके,

(ऐसा) आनंद जो है तुलना से परे।

सुन्दर धरती कनान की

है दुनिया परमेश्वर के वचनों की।

मसीह का राज्य है धरती कनान की।

मधुर है प्रेम हमारा उनके लिये,

नचाता है ये प्रेम हमें आनंद से।

धरती पर कनान की,

अनंत काल तक आराधना करेंगे परमेश्वर-जन उनकी।

शामिल हुआ/हुई हूँ मैं मेमने के भोज में,

जीवन आनंदमय है परमेश्वर के प्रेम में।

स्वीकार लिया है मैंने,

मसीह के राज्य की व्यवहारिक तालीम को।

गुज़रा/गुज़री हूँ मैं आँसुओं की घाटी से भले ही,

मगर असली है प्रेम जो दिया है मुझे परमेश्वर ने।

हो रहा है शुद्ध हृदय मेरा, मुश्किलों और इम्तहानों से।

बनाता है ये उनके लिये मेरे प्रेम को निर्मल।

दिन-ब-दिन बढ़ता जाता है प्रेम ये।

III

परमेश्वर की ख़ातिर प्रेम भर देता है

आनंद से दिल को मेरे।

बेहद भरोसेमंद हैं, धार्मिक हैं परमेश्वर,

मोहित करते हैं, रिझाते हैं मुझे।

स्वभाव परमेश्वर का बेहद प्यारा है!

बस गया है मज़बूती से ये दिल में मेरे।

परमेश्वर की पवित्रता और सुंदरता को,

बेपनाह प्यार करता/करती हूँ मैं।

उनके स्तुति-गान से लबालब हूँ मैं।

मसीह का राज्य है धरती कनान की।

मधुर है प्रेम हमारा उनके लिये,

नचाता है ये प्रेम हमें आनंद से।

धरती पर कनान की,

अनंत काल तक आराधना करेंगे परमेश्वर-जन उनकी।

IV

सितारे आसमाँ से मुस्कराते हैं मुझे देखकर।

चमकती है रोशनी सूरज की पूरी दुनिया पर।

हर चीज़ को भिगो देती है शबनम।

अतिशय बेजोड़ हैं वचन परमेश्वर के,

मदद करते हैं मेरी मज़बूत बनने में, संग रहकर मेरे।

बेहद मधुर है भोज हमारा,

भरपूर पोषण परमेश्वर का बनाता है सम्पन्न हमें।

स्वर्ग की ही तरह है धरती पर जीवन,

उनके संग रहते हैं सभी परमेश्वर-जन।

न आँसू हैं, न उदासी है,

कनान की धरती पर।

अनंत काल तक यही है जीवन हमारा,

सम्मुख परमेश्वर के जीवन हमारा।

कभी न होंगे उनसे जुदा हम!

मेरे प्रिय, बयाँ न कर सकूँ

मैं प्रियता आपकी।

धार्मिक है, पवित्र है न्याय आपका,

करता है शुद्ध और निर्मल हृदय मेरा।

हद मधुर हैं वचन आपके,

स्नेह देते (हैं), द्रवित करते (हैं) दिल को मेरे।

बेहद सुंदर (है) अब जीवन मेरा।

क्योंकि कर सकता/सकती (हूँ) अब प्रेम आपको मैं,

रहता है दिनभर आनंदित दिल मेरा।

काश (मैं) रह पाऊँ इस जीवन-भर संग आपके।

मसीह का राज्य है धरती कनान की।

मधुर है प्रेम हमारा उनके लिये,

नचाता है ये प्रेम हमें आनंद से।

धरती पर कनान की,

अनंत काल तक आराधना करेंगे परमेश्वर-जन उनकी।

मसीह का राज्य है धरती कनान की।

मधुर है प्रेम हमारा उनके लिये,

नचाता है ये प्रेम हमें आनंद से।

धरती पर कनान की,

अनंत काल तक आराधना करेंगे परमेश्वर-जन उनकी।

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