181 इरादा पक्का है परमेश्वर के अनुसरण का

1

परमेश्वर में आज तक आस्था रखकर, आख़िर देख ली है रोशनी मैंने।

यातना और तकलीफ़ों की पथरीली राह पर चली हूँ मैं।

तज दिया संसार ने मुझको, दोस्त भी दूर-दूर रहते हैं।

न जाने कितनी रातें प्रार्थना में, जागकर गुज़ारी हैं मैंने।

ग़म और ख़ुशी के न जाने, कितने आँसू बहाए हैं मैंने।

दौड़ती रहती हूँ दिनभर, चैन कहीं न पाया मैंने।

आज़ादी महज़ नाम को है, इंसान का हक न देखा मैंने।

शैतान से बेइंतिहा नफ़रत है मुझे,

मसीह आए, संभाले सत्ता, इंतज़ार है मुझे।

इंसानी ज़िंदगी की रोशनी तलाश करूँ मैं,

दुनिया की बुराई और अंधेरे, मजबूर कर रहे हैं मुझे।

सच्चाई है, रास्ता है, ज़िंदगी है मसीह,

आख़िरी साँस तक उसे मानती रहूंगी मैं।

इंसानी ज़िंदगी की रोशनी तलाश करूँ मैं,

दुनिया की बुराई और अंधेरे, मजबूर कर रहे हैं मुझे।

सच्चाई है, रास्ता है, ज़िंदगी है मसीह,

आख़िरी साँस तक उसे मानती रहूंगी मैं।

2

गिरा दिया है चरवाहे को परमेश्वर ने,

बड़े इम्तहानों से गुज़र रहे हैं हम।

हवाओं में ख़ौफ़ छाया है, आसमां में काले बादल घिर रहे हैं।

शेर की माँद में जा गिरी हूँ कितनी बार,

मौत के पँजों से बचकर निकली हूँ मैं।

परमेश्वर के वचनों ने दिलासा दी है,

उसी के वचनों ने दिल को शक्ति दी है।

यातना, तकलीफ़ और दुख सहकर,

जानती हूँ परमेश्वर ही प्यारा है मुझे।

हर चीज़ पर अधिकार है परमेश्वर का,

मगर इन्सान का विश्वास दयनीय है।

इम्तहान की भट्टी से गुज़रकर, बहुत कुछ पाता है इंसान।

देखती हूँ शैतान का सार मैं,

बड़े लाल अजगर से और घृणा करती हूँ।

अनगिनत रूहों को दूषित किया, निगल लिया,

अधम और बेरहम बड़े लाल अजगर ने।

आसान नहीं है सच और ज़िंदगी को पाना,

परमेश्वर के लिये मुझे अपने प्यार को दुगुना करना होगा,

उसके दिल को सुकून देना होगा।

अनगिनत रूहों को दूषित किया, निगल लिया,

अधम और बेरहम बड़े लाल अजगर ने।

आसान नहीं है सच और ज़िंदगी को पाना,

परमेश्वर के लिये मुझे अपने प्यार को दुगुना करना होगा,

उसके दिल को सुकून देना होगा,

उसके दिल को सुकून देना होगा।

3

परमेश्वर के काम को याद करती हूँ,

वो मुझे प्यारा है, गहराई से महसूस करती हूँ।

परमेश्वर के न्याय को स्वीकार करके, बदल गया है स्वभाव मेरा।

शुद्धिकरण और ताड़ना की मुश्किलें, देती हैं परमेश्वर का ज्ञान गहरा।

विश्वास रख पाना सर्वशक्तिमान परमेश्वर में,

आनंददायक बात है वास्तव में।

सच्चे परमेश्वर के लिये सहयोग देकर, पा लिया है सुकून मेरे दिल ने।

वफ़ादारी से अपना फ़र्ज़ निभाकर, मुश्किलें हैं मगर, ख़ुश हूँ मैं।

इंसान की ज़िंदगी छोटी है बहुत,

सबसे बड़ा वरदान है परमेश्वर से मोहब्बत करना।

देता है मेरे दिल को सुकूँ, परमेश्वर की सेवा कर पाना।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने ही बचाया है मुझे,

उसी ने दी है सच्चे इंसान की ज़िंदगी मुझे।

मेरा सबसे प्रिय सपना साकार हुआ है,

और चली जाऊंगी मैं कल के सफ़र में।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने ही बचाया है मुझे,

उसी ने दी है सच्चे इंसान की ज़िंदगी मुझे।

मेरा सबसे प्रिय सपना साकार हुआ है,

और चली जाऊंगी मैं कल के सफ़र में,

और चली जाऊंगी मैं कल के सफ़र में।

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