167 परमेश्वर का प्रेम साथ हो तो, मुझे किसी का भय नहीं

1

सीसीपी ईसाइयों को सताती और उन्हें गिरफ्तार कर लेती है, उनका उत्पीड़न और उन पर अत्याचार करती है,

हमें मसीह के नक्शेकदम पर चलने से रोकने की व्यर्थ आशा करती है।

दुष्ट पुलिस मुझे मारती है, जिस्म को ज़ख़्मों से छलनी कर मुझे मौत के दरवाज़े पर छोड़ देती है,

मेरे शरीर और मेरे विश्वास को मिटाने की इतनी बेसब्र कोशिश करती है।

उन्होंने मुझे धमकी दी, लालच दिया, भाइयों-बहनों को धोखा देने के लिए मुझे मजबूर करने की कोशिश की,

मुझे ईश्वर से विश्वासघात करने, यहूदा बनने और ईश्वर के उद्धार को गँवा देने पर मजबूर करने के लिए चाल चली।

ऐसे मुश्किल हालात में, मेरे कानों में परमेश्वर के वचन गूँजते थे,

उनके कारण मैं शैतान की चालक चालों को समझ पाता था और अपनी गवाही में अटल खड़ा रह पाता था।

भले ही मैं शैतान की माँद में गिर गया था, लेकिन जब मैंने परमेश्वर को अपने साथ देखा,

तो मैं अकेला और नकारात्मक नहीं रहा, बल्कि मैंने विश्वास और शक्ति पायी।

2

कैद पूरी करके छूटने के बाद, सीसीपी मुझ पर नज़र रखती रही,

मेरी निजी आज़ादी को सीमित कर दिया। मुझे लगा कि मैं घर में नज़रबंद हूँ।

पुलिस अक्सर किसी झूठे बहाने से मेरे घर आती थी,

मुझसे पूछती थी कि क्या मैं अब भी परमेश्वर में विश्वास करता था, सभा में जाता था और सुसमाचार फैलाता था।

बुरे सपनों से डरकर मैं अक्सर नींद से जाग जाता था।

जो भी यातना झेली मैंने, उसकी यादें मुझे डर और घृणा से भर देती हैं।

मेरा दिल चीख़कर कहता है कि चीन वास्तव में एक शैतानी जेल है।

लोगों को कोई आज़ादी नहीं है, जबरन मत-परिवर्तन किया जाता है, उनके बोलने पर भी नियंत्रण किया जाता है।

यह दावा कि वहाँ लोग आस्था की आज़ादी का आनंद लेते हैं, दुनिया के सामने एक अच्छी छवि बनाने के लिए सीसीपी द्वारा बोला गया महज़ एक झूठ है।

इस खुल्लमखुल्ला नरसंहार द्वारा सीसीपी की दुष्ट प्रकृति उजागर होती है।

मुझे यकीन है कि मसीह सत्य, मार्ग और जीवन है।

सीसीपी मुझे जैसे चाहे सताए, मगर मैं अंत तक मसीह का अनुसरण करने को संकल्पित हूँ।

भले ही इसके लिए मुझे अपने जीवन का बलिदान करना पड़े, मैं परमेश्वर के लिए एक गुंजायमान गवाही बनूँगा।

न जाने यह अंतहीन रात कब ख़त्म होगी,

मगर जब राह दिखाने के लिये परमेश्वर का प्रेम और प्रोत्साहित करने के लिए परमेश्वर के वचन साथ हैं, तो डरने की कोई बात नहीं है।

पिछला: 166 काश हम जान जायें परमेश्वर की मनोहरता

अगला: 168 अ‍पनी पसंद पर अ‍फ़सोस नहीं

परमेश्वर की ओर से एक आशीर्वाद—पाप से बचने और बिना आंसू और दर्द के एक सुंदर जीवन जीने का मौका पाने के लिए प्रभु की वापसी का स्वागत करना। क्या आप अपने परिवार के साथ यह आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं?

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें