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कैसे शासन करता है हर चीज़ पर परमेश्वर

I

जिस पल रोते हुए दुनिया में आते हो तुम,

उस पल से अपना काम करना शुरू कर देते हो तुम।

उसकी योजना और विधान में, अपनी अपनाकर भूमिका,

ज़िंदगी के सफ़र की शुरुआत कर देते हो तुम।

कैसे भी हों पहले के हालात, कैसा भी हो आगे का सफ़र,

बच नहीं सकता स्वर्ग की व्यवस्था से कोई,

नहीं है किसी के काबू में तकदीर उसकी,

जो करता है हर चीज़ पे शासन इस काम के काबिल है वही।

II

जिस दिन से आया है इंसान वजूद में,

तब से लगा है परमेश्वर अविचल अपने काम में,

कर रहा है प्रबंधन कायनात का, दे रहा है निर्देश बदलाव को,

कर रहा है संचालन हर चीज़ का वो।

हर चीज़ की तरह, इंसान अनजाने में, ख़ामोशी से,

पाता है मधुरता, बारिश और शबनम का पोषण परमेश्वर से।

हर चीज़ की तरह, इंसान अनजाने में,

जीता है परमेश्वर के हाथों के आयोजन के तले।

थाम रखे हैं दिल और आत्मा इंसान के परमेश्वर के हाथों ने,

पूरी ज़िंदगी इंसान की सामने है परमेश्वर की आँखों के।

तुम्हें यकीन हो न हो,

हर चीज़ का, वो ज़िंदा हो या मुर्दा हो,

परमेश्वर के विचार के मुताबिक बदलेगी जगह,

तब्दील होगी, नई हो जाएगी, ग़ायब हो जाएगी हर चीज़।

इस तरह शासन करता है हर चीज़ पर परमेश्वर, हर चीज़ पर परमेश्वर।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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