6. आप इस बात की गवाही देते हैं कि वचन देह में प्रकट होता है, मेम्ने के द्वारा खोला गया छोटा वो स्क्रॉल है जिसकी प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में भविष्यवाणी की गई है। हम ऐसा नहीं मानते। हम मानते हैं कि "छोटा स्क्रॉल" बाइबल को संदर्भित करता है, बाइबिल ही छोटा स्क्रॉल है, और यह पर्याप्त है कि हम केवल बाइबल पढ़ते रहें।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्तक देखी जो भीतर और बाहर लिखी हुई थी, और वह सात मुहर लगाकर बन्द की गई थी । फिर मैं ने एक बलवन्त स्वर्गदूत को देखा जो ऊँचे शब्द से यह प्रचार करता था, 'इस पुस्तक के खोलने और उसकी मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है?' परन्तु न स्वर्ग में, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्तक को खोलने या उस पर दृष्‍टि डालने के योग्य निकला। तब मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्तक के खोलने या उस पर दृष्‍टि डालने के योग्य कोई न मिला। इस पर उन प्राचीनों में से एक ने मुझ से कहा, 'मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है'" (प्रकाशितवाक्य 5:1-5)।

"जिस शब्द को मैं ने स्वर्ग से बोलते सुना था, वह फिर मेरे साथ बातें करने लगा, 'जा, जो स्वर्गदूत समुद्र और पृथ्वी पर खड़ा है, उसके हाथ में की खुली हुई पुस्तक ले ले।' मैं ने स्वर्गदूत के पास जाकर कहा, 'यह छोटी पुस्तक मुझे दे।' उसने मुझ से कहा, 'ले, इसे खा ले; यह तेरा पेट कड़वा तो करेगी, पर तेरे मुँह में मधु सी मीठी लगेगी।' अत: मैं वह छोटी पुस्तक उस स्वर्गदूत के हाथ से लेकर खा गया। वह मेरे मुँह में मधु सी मीठी तो लगी, पर जब मैं उसे खा गया, तो मेरा पेट कड़वा हो गया" (प्रकाशितवाक्य 10:8-10)।

"जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। जो जय पाए, उस को मैं गुप्‍त मन्ना में से दूँगा" (प्रकाशितवाक्य 2:17)।

"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

जब मैं अंत के दिनों में अपनी सूचीपत्र खोलूँगा तब मैं तुम लोगों को बताऊँगा। ("सूचीपत्र" से तात्पर्य उन सभी वचनों से है जो मैंने बोले हैं, जो मैंने अंत के दिनों में बोले हैं—इसमें वे सभी वचन हैं।)

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 110' से उद्धृत

अंत के दिन अंत के दिनों से बढ़कर नहीं हैं और राज्य के युग से बढ़कर नहीं हैं, और वे अनुग्रह के युग या व्यवस्था के युग का प्रतिनिधित्व नहीं करते। बात यह है कि अंत के दिनों के दौरान छह हज़ार वर्षीय प्रबंधन योजना का समस्त कार्य तुम लोगों पर प्रकट किया जा रहा है। यह रहस्य का अनावरण है। यह ऐसा रहस्य है, जिसे किसी भी मनुष्य द्वारा अनावृत नहीं किया जा सकता। चाहे मनुष्य को बाइबल की कितनी भी अधिक समझ क्यों न हो, वह वचनों से बढ़कर नहीं है, क्योंकि मनुष्य बाइबल के सार को नहीं समझता। बाइबल पढ़ने से मनुष्य कुछ सत्य समझ सकता है, कुछ वचनों की व्याख्या कर सकता है या कुछ प्रसिद्ध अंशों और अध्यायों को अपनी क्षुद्र जाँच का भागी बना सकता है, परंतु वह उन वचनों के भीतर निहित अर्थ निकालने में कभी समर्थ नहीं होगा, क्योंकि मनुष्य जो कुछ देखता है, वह सब मृत वचन हैं, यहोवा और यीशु के कार्य के दृश्य नहीं हैं, और मनुष्य के पास इस कार्य के रहस्य को सुलझाने का कोई उपाय नहीं है। इसलिए, छह हज़ार वर्षीय प्रबंधन-योजना का रहस्य सबसे बड़ा रहस्य है, अत्यधिक छिपा हुआ, और मनुष्य के लिए सर्वथा अबूझ। कोई भी सीधे तौर पर परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझ सकता, जब तक कि स्वयं परमेश्वर उसे मनुष्य को न समझाए और प्रकट न करे; अन्यथा ये चीज़ें मनुष्य के लिए हमेशा पहेली बनी रहेंगी, हमेशा मुहरबंद रहस्य बनी रहेंगी। धार्मिक जगत के लोगों की तो बात छोड़ो; यदि तुम लोगों को भी आज न बताया जाता, तो तुम लोग भी इसे न समझ पाते। छह हज़ार वर्षों का यह कार्य नबियों की सभी भविष्यवाणियों से अधिक रहस्यमय है। यह दुनिया के सृजन से लेकर अब तक का सबसे बड़ा रहस्य है, और समस्त युगों का कोई भी नबी कभी भी इसकी थाह पाने में सक्षम नहीं हुआ है, क्योंकि यह रहस्य केवल अंतिम युग में ही खोला जा रहा है और पहले कभी प्रकट नहीं किया गया है। यदि तुम लोग इस रहस्य को समझ सकते हो, और यदि तुम इसे इसकी समग्रता में प्राप्त करने में समर्थ हो, तो सभी धार्मिक व्यक्तियों को इस रहस्य से जीत लिया जाएगा। केवल यही सबसे बड़ा दर्शन है; यही है जिसे समझने के लिए मनुष्य सबसे अधिक लालायित रहता है, किंतु यह उसके लिए सबसे अधिक अस्पष्ट भी है। जब तुम लोग अनुग्रह के युग में थे, तो तुम नहीं जानते थे कि यीशु द्वारा किया गया कार्य क्या था या यहोवा ने क्या कार्य किया था। लोगों को समझ में नहीं आता था कि यहोवा ने क्यों व्यवस्थाएँ निर्धारित कीं, उसने क्यों लोगों को व्यवस्थाओं का पालन करने के लिए कहा अथवा मंदिर क्यों बनाने पड़े थे, और लोगों को यह तो बिलकुल भी समझ में नहीं आया कि क्यों इस्राएलियों को मिस्र से बीहड़ में और फिर कनान में ले जाया गया। ये मामले आज तक प्रकट नहीं किए गए थे।

... अंत के दिनों का कार्य यहोवा और यीशु के कार्य को और उन सभी रहस्यों को प्रकट करता है, जिन्हें मनुष्य द्वारा समझा नहीं गया था, ताकि मानवजाति की मंज़िल और अंत प्रकट किया जा सके और मानवजाति के बीच उद्धार का समस्त कार्य समाप्त हो सके। अंत के दिनों में कार्य का यह चरण सभी चीज़ों को समाप्ति की ओर ले आता है। मनुष्य द्वारा समझे न गए सभी रहस्यों को प्रकट किया जाना आवश्यक है, ताकि मनुष्य उन्हें उनकी गहराई तक जान सकें और उनके हृदयों में उनकी एक पूरी तरह से स्पष्ट समझ उत्पन्न हो सके। केवल तभी मानवजाति को प्रकार के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देहधारण का रहस्य (4)' से उद्धृत

बाइबल की इस वास्तविकता को कोई नहीं जानता कि यह परमेश्वर के कार्य के ऐतिहासिक अभिलेख और उसके कार्य के पिछले दो चरणों की गवाही से बढ़कर और कुछ नहीं है, और इससे तुम्हें परमेश्वर के कार्य के लक्ष्यों की कोई समझ हासिल नहीं होती। बाइबल पढ़ने वाला हर व्यक्ति जानता है कि यह व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के दौरान परमेश्वर के कार्य के दो चरणों को लिखित रूप में प्रस्तुत करता है। पुराने नियम सृष्टि के समय से लेकर व्यवस्था के युग के अंत तक इस्राएल के इतिहास और यहोवा के कार्य को लिपिबद्ध करता है। पृथ्वी पर यीशु के कार्य को, जो चार सुसमाचारों में है, और पौलुस के कार्य नए नियम में दर्ज किए गए हैं; क्या ये ऐतिहासिक अभिलेख नहीं हैं? अतीत की चीज़ों को आज सामने लाना उन्हें इतिहास बना देता है, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितनी सच्ची और यथार्थ हैं, वे हैं तो इतिहास ही—और इतिहास वर्तमान को संबोधित नहीं कर सकता, क्योंकि परमेश्वर पीछे मुड़कर इतिहास नहीं देखता! तो यदि तुम केवल बाइबल को समझते हो और परमेश्वर आज जो कार्य करना चाहता है, उसके बारे में कुछ नहीं समझते और यदि तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो, किन्तु पवित्र आत्मा के कार्य की खोज नहीं करते, तो तुम्हें पता ही नहीं कि परमेश्वर को खोजने का क्या अर्थ है। यदि तुम इस्राएल के इतिहास का अध्ययन करने के लिए, परमेश्वर द्वारा समस्त लोकों और पृथ्वी की सृष्टि के इतिहास की खोज करने के लिए बाइबल पढ़ते हो, तो तुम परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते। किन्तु आज, चूँकि तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो और जीवन का अनुसरण करते हो, चूँकि तुम परमेश्वर के ज्ञान का अनुसरण करते हो और मृत पत्रों और सिद्धांतों या इतिहास की समझ का अनुसरण नहीं करते हो, इसलिए तुम्हें परमेश्वर की आज की इच्छा को खोजना चाहिए और पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा की तलाश करनी चाहिए। यदि तुम पुरातत्ववेत्ता होते तो तुम बाइबल पढ़ सकते थे—लेकिन तुम नहीं हो, तुम उनमें से एक हो जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं। अच्छा होगा तुम परमेश्वर की आज की इच्छा की खोज करो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'बाइबल के विषय में (4)' से उद्धृत

अंत के दिनों का मसीह जीवन लेकर आता है, और सत्य का स्थायी और शाश्वत मार्ग लेकर आता है। यह सत्य वह मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य जीवन प्राप्त करता है, और यह एकमात्र मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर द्वारा स्वीकृत किया जाएगा। यदि तुम अंत के दिनों के मसीह द्वारा प्रदान किया गया जीवन का मार्ग नहीं खोजते हो, तो तुम यीशु की स्वीकृति कभी प्राप्त नहीं करोगे, और स्वर्ग के राज्य के फाटक में प्रवेश करने के योग्य कभी नहीं हो पाओगे, क्योंकि तुम इतिहास की कठपुतली और कैदी दोनों ही हो। वे लोग जो नियमों से, शब्दों से नियंत्रित होते हैं, और इतिहास की जंजीरों में जकड़े हुए हैं, न तो कभी जीवन प्राप्त कर पाएँगे और न ही जीवन का शाश्वत मार्ग प्राप्त कर पाएँगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पास, सिंहासन से प्रवाहित होने वाले जीवन के जल की बजाय, बस मैला पानी ही है जिससे वे हजारों सालों से चिपके हुए हैं। वे जिन्हें जीवन के जल की आपूर्ति नहीं की गई है, हमेशा के लिए मुर्दे, शैतान के खिलौने, और नरक की संतानें बने रहेंगे। फिर वे परमेश्वर को कैसे देख सकते हैं? यदि तुम केवल अतीत को पकड़े रखने की कोशिश करते हो, केवल जड़वत खड़े रहकर चीजों को जस का तस रखने की कोशिश करते हो, और यथास्थिति को बदलने और इतिहास को ख़ारिज़ करने की कोशिश नहीं करते हो, तो क्या तुम हमेशा परमेश्वर के विरुद्ध नहीं होगे? परमेश्वर के कार्य के चरण उमड़ती लहरों और गरजते तूफानों की तरह विशाल और शक्तिशाली हैं—फिर भी तुम निठल्ले बैठकर तबाही का इंतजार करते हो, अपनी नादानी से चिपके रहते हो और कुछ भी नहीं करते हो। इस तरह, तुम्हें मेमने के पदचिह्नों का अनुसरण करने वाला व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? तुम जिस परमेश्वर को थामे हो उसे उस परमेश्वर के रूप में सही कैसे ठहरा सकते हो जो हमेशा नया है और कभी पुराना नहीं होता? और तुम्हारी पीली पड़ चुकी किताबों के शब्द तुम्हें नए युग में कैसे ले जा सकते हैं? वे परमेश्वर के कार्य के चरणों को ढूँढ़ने में तुम्हारी अगुआई कैसे कर सकते हैं? और वे तुम्हें ऊपर स्वर्ग में कैसे ले जा सकते हैं? तुम अपने हाथों में जो थामे हो वे शब्द हैं, जो तुम्हें केवल अस्थायी सांत्वना दे सकते हैं, जीवन देने में सक्षम सत्य नहीं दे सकते। तुम जो शास्त्र पढ़ते हो वे केवल तुम्हारी जिह्वा को समृद्ध कर सकते हैं और ये बुद्धिमत्ता के वचन नहीं हैं जो मानव जीवन को जानने में तुम्हारी मदद कर सकते हैं, तुम्हें पूर्णता की ओर ले जाने की बात तो दूर रही। क्या यह विसंगति तुम्हारे लिए गहन चिंतन का कारण नहीं है? क्या यह तुम्हें अपने भीतर समाहित रहस्यों का बोध नहीं करवाती है? क्या तुम परमेश्वर से अकेले में मिलने के लिए अपने आप को स्वर्ग को सौंप देने में समर्थ हो? परमेश्वर के आए बिना, क्या तुम परमेश्वर के साथ पारिवारिक आनंद मनाने के लिए अपने आप को स्वर्ग में ले जा सकते हो? क्या तुम अभी भी स्वप्न देख रहे हो? तो मेरा सुझाव यह है कि तुम स्वप्न देखना बंद कर दो और उसकी ओर देखो जो अभी कार्य कर रहा है—उसकी ओर देखो जो अब अंत के दिनों में मनुष्य को बचाने का कार्य कर रहा है। यदि तुम ऐसा नहीं करते हो, तो तुम कभी भी सत्य प्राप्त नहीं करोगे, और न ही कभी जीवन प्राप्त करोगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है' से उद्धृत

पिछला: 5. बाइबल परमेश्वर के कार्य की गवाही है। यह बाइबल के माध्यम से है कि वे सब जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं, इसे स्वीकार करते हैं कि आकाश और पृथ्वी और सभी चीज़ें परमेश्वर द्वारा बनाई गईं थीं। यह बाइबल के कारण है कि वे परमेश्वर के कार्यों के आश्चर्य, महानता और सर्वशक्तिमानता को देखते हैं। इसके अतिरिक्त, बाइबल में परमेश्वर के कई वचन हैं और मनुष्य की अनुभवात्मक गवाहियाँ हैं जो मनुष्य के जीवन के लिए प्रावधान प्रदान करने में सक्षम हैं, और मनुष्य के लिए बहुत अधिक शिक्षाप्रद हैं। क्या हम बाइबल को पढ़ने से अनंत जीवन पा सकते हैं? या क्या बाइबल में अनंत जीवन का मार्ग नहीं है?

अगला: 7. आप गवाही देते हैं कि वचन देह में प्रकट होता है में परमेश्वर के नए वचन हैं, लेकिन प्रकाशितवाक्य की पुस्तक स्पष्ट रूप से कहती है, "मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूँ : यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्‍वर उन विपत्तियों को, जो इस पुस्तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा" (प्रकाशितवाक्य 22:18)। क्या यह बाइबल में कुछ जोड़ना नहीं है?

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प्रश्न 27: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं?

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