971 मनुष्य परमेश्वर के संरक्षण में विकसित होता है

1 परमेश्वर मनुष्यों को सुरक्षा की गारंटी देने, और यह गारंटी देने कि वे शैतान के द्वारा निगले नहीं जाएँगे के अतिरिक्त बहुत कुछ करता है; वह किसी को चुनने और उन्हें बचाने की तैयारी में बहुत से कार्य करता है। हम अब देख सकते हैं कि जो कुछ भी परमेश्वर करता है, जिसे वह अत्यंत परिश्रम से मनुष्य के लिए व्यवस्थित करता है वह सब बेदाग होता है। परमेश्वर प्रत्येक प्राणी के लिए जो कुछ करता है, वह सन्देह से परे होता है; वह हर किसी की हाथ से अगुवाई करता है, हर क्षण तुम्हारी देखरेख करता है और उसने तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ा है। जब लोग इस प्रकार के वातावरण में पनपते हैं और इस प्रकार की पृष्ठभूमि में पनपते हैं, तो क्या हम कह सकते हैं कि लोग वास्तव में परमेश्वर की हथेली में पनपते हैं? (हाँ।) तो फिर परमेश्वर ने धरती पर किया क्या है? (वह मानवजाति की देख-रेख रखता है।) जो कुछ परमेश्वर करता है उसके पीछे का महान विचार एवं देखभाल सवालों से परे है।

2 अपने लम्बे जीवनभर में, मूलत: प्रत्येक व्यक्ति ने अनेक ख़तरनाक परिस्थितियों का सामना किया है और वह अनेक प्रलोभनों से होकर गुज़र चुका है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शैतान बिलकुल तुम्हारे बगल में है, उसकी आँखें लगातार तुम्हारे ऊपर जमी रहती हैं। उसे यह अच्छा लगता है जब तुम पर आपदा आती है, जब तुम पर विपदाएँ पड़ती हैं, जब तुम्हारे लिए कुछ भी सही नहीं होता है, और उसे अच्छा लगता है जब तुम शैतान के जाल में फँस जाते हो। जहाँ तक परमेश्वर की बात है, वह लगातार तुम्हारी सुरक्षा कर रहा है, एक के बाद एक दुर्भाग्य से और एक के बाद एक आपदा से तुम्हें बचा रहा है। इसीलिए मैं कहता हूँ कि जो कुछ मनुष्य के पास है—शान्ति और आनन्द, आशीषें एवं व्यक्तिगत सुरक्षा—सब-कुछ वास्तव में परमेश्वर के नियंत्रण के अधीन है, और वह हर प्राणी के भाग्य का मार्गदर्शन एवं निर्धारण करता है।

3 क्या ऐसा नहीं है? परमेश्वर व्यर्थ में नहीं बोलता है, न ही वह घमंड से ऊँचाई पर खड़ा होता है और न ही वह मनुष्य को मूर्ख बनाकर काम चलाता है। इसके बजाय वह ईमानदारी एवं खामोशी से उन चीज़ों को करता है जो उसे स्वयं करने की आवश्यकता है। ये चीज़ें मनुष्य के लिए आशीषें, शान्ति एवं आनन्द लाती हैं। ये मनुष्य को शांति एवं प्रसन्नता से परमेश्वर की दृष्टि के सामने और उसके परिवार में लाती हैं; और उचित तर्क और विचार के साथ वे परमेश्वर के सामने रहते हैं और परमेश्वर के उद्धार को स्वीकारते हैं। परमेश्वर में कोई छल नहीं है, और कोई झूठ नहीं है। परमेश्वर विश्वासयोग्य है और जो कुछ वह करता है वह वास्तविक होता है। वही एकमात्र है जिस पर लोग भरोसा कर सकते हैं, एकमात्र परमेश्वर है जिसे लोग अपना जीवन एवं अपना सर्वस्व सौंप सकते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" से रूपांतरित

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