966 परमेश्वर धर्मी है सभी के लिये

I

अगर सवाल परमेश्वर को खोजने का है, अगर सवाल परमेश्वर से पेश आने का है,

तो तुम्हारा रवैया सबसे ज़्यादा मायने रखता है।

परमेश्वर को तुम नज़रंदाज़ नहीं कर सकते,

ना छोड़ सकते हो अपने मन के किसी कोने में।

अपनी आस्था के परमेश्वर को सदा जीवंत, सच्चा परमेश्वर समझो।

वो किसी तीसरे स्वर्ग में बेकार नहीं बैठा है।

वो सब देखता रहता है, कौन क्या करता है,

दिल किसका कैसा है, कौन क्या बोलता है, क्या करता है,

क्या किरदार अदा करता है, परमेश्वर से कैसे बर्ताव करता है।

तुम परमेश्वर को समर्पण करो ना करो मगर,

तुम्हारे करम और ख़्याल उसकी नज़रों में हैं।

परमेश्वर धर्मी है सभी के लिये।

इंसान की जीत और उद्धार, इनकी है अहमियत उसके लिये।

हर एक के लिये संजीदा है वो,

ना कभी बर्ताव करता पालतू पशु की तरह किसी से,

ना ही किसी खेल की तरह, जो जीतना है उसे।


II

परमेश्वर का प्यार बिगाड़ने वाला नहीं,

उसकी करुणा बेपरवाह नहीं।

हर एक ज़िंदगी को संजोता है, सम्मान देता है वो।

उसकी करुणा में, संयम में उम्मीदें होती हैं।

इंसान को जीने के लिये इन्हीं की ज़रूरत होती है।

परमेश्वर जीवंत है, उसका सच्चा अस्तित्व है।

इंसान के लिये उसका रवैया, उसूलों पर चलता है।

इंसान बदलता है तो ये भी बदलता है।

वक्त, हालात और इंसान के रवैये के मुताबिक, परमेश्वर का दिल भी बदलता है।


III

सुनो, ना बनो ऐसा बच्चा जिसे, नज़ाकत से संभाला है परमेश्वर ने।

अगर तुम्हें लगता है, तुम्हीं पर लुटाएगा वो अपना सारा प्यार,

जैसे कभी ना छोड़ेगा तुम्हें,

ना तुम्हारे लिए कभी बदलेगा रवैया उसका,

तो जल्दी भुला दो, ना देखो ये सपना।

परमेश्वर का सार कभी भी ना बदलेगा, इसे जान लो, अच्छी तरह समझ लो।

अलग वक्त और अलग हालात के मुताबिक स्वभाव परमेश्वर का बाहर झलकता है।

परमेश्वर सदा जीवंत है, मौजूद है सदा।

परमेश्वर के प्रति तुम्हारे बर्ताव, तुम्हारे रवैये के मुताबिक,

तुम्हारे लिये उसकी राय, उसका रवैया बदलता रहता है।


"वचन देह में प्रकट होता है" से

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