628 त्याग दो धार्मिक अवधारणाएं परमेश्वर द्वारा पूर्ण किये जाने के लिए

I

अगर करते हो स्वीकार तुम परमेश्वर के वचनों का

न्याय और ताड़ना, तो कह दो धार्मिक तौर-तरीकों को अलविदा,

परमेश्वर के नये वचनों को मापने के लिए न करना इस्तेमाल पुरानी धारणा,

तभी तुम्हारे पास एक भविष्य होगा।

लेकिन चिपके रहे पुरानी चीज़ों से अगर, संजोये रहे तुम उन्हें,

तो बचाए जाने का कोई रास्ता ना होगा,

परमेश्वर तुम पर कभी ध्यान न देगा।

परमेश्वर अपने कार्य और वचन में नहीं करता बात

इतिहास के तरीकों की, पहले की चीज़ों की।

अगर तुम चाहते हो पूर्ण बनाया जाना,

तो पुरानी बातों को तुम्हें छोड़ना होगा।

जो था सही कभी, या किया था परमेश्वर ने

उसे भी किनारे तुम्हें करना होगा।

भले ही रहा हो वो काम आत्मा का, उसे भी किनारे तुम्हें करना होगा।

यही है अपेक्षा परमेश्वर की। सब कुछ नया किया जाना होगा।

II

परमेश्वर है नया हमेशा और नहीं कभी पुराना।

वो चिपके नहीं रहता अपने पुराने वचनों से

या नहीं करता नियमों का पालन।

इन्सान के तौर पर, तुम पुरानी चीज़ों से चिपके रहते हो,

मानो हों वे कोई सूत्र, कड़ाई से उन्हें इस्तेमाल करते हो।

लेकिन जब, परमेश्वर वैसे कार्य नहीं करता जैसे पहले करता था,

तो क्या तुम्हारे काम और शब्द बाधाकारी नहीं?

अतीत से चिपके रहे जो, तो क्या तुम परमेश्वर के शत्रु नहीं?

क्या पुरानी बातों के लिए, अपना जीवन बर्बाद कर दोगे यूँ ही?

III

ये पुरानी चीज़ें तुमसे परमेश्वर के काम में बाधा डलवातीं हैं।

क्या तुम ऐसा इन्सान बनना चाहते हो?

अगर ऐसा नहीं चाहते हो, तो उसे रोक दो जो कर रहे हो।

मार्ग बदलो, फिर से शुरुआत करो,

परमेश्वर तुम्हारे पुराने काम याद न रखेगा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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