28 परमेश्वर की स्तुति करने हम खुशी से एकत्रित होते हैं

स्तुति करो, खुश हो जाओ! परमेश्वर विजयी होकर लौटा है।

यह हमारा कर्तव्य है कि हम परमेश्वर की गवाही दें

और उसकी स्तुति करें।


I

परमेश्वर की स्तुति करने हम एकत्रित होते हैं,

और हम बहुत खुश हैं।

हम परमेश्वर के पद-चिन्हों पर चलते हैं

और भोज में शामिल होते हैं।

हम देहधारी परमेश्वर की स्तुति करते हैं

जब वह एक नए युग को प्रारंभ करता है।

परमेश्वर खुद कार्य करता है और हमारे बीच बोलता है,

वह इंसान की हर नाइंसाफ़ी का न्याय करता है

और उसकी भ्रष्टता को उजागर करता है।

आपने-सामने होकर, हम परमेश्वर के प्रकटन को देखते हैं।

उसका स्वभाव दयालु, प्रतापी और धर्मी है।

स्तुति करो, खुश हो जाओ! परमेश्वर विजयी होकर लौटा है।

स्तुति करो, खुश हो जाओ! परमेश्वर विजयी होकर लौटा है।


II

हम परमेश्वर के वचनों को खाते-पीते हैं,

परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं,

और हमारे दिलों में मजबूती है।

सत्य को जानकर,

हमारे पास अनुसरण का एक नया मार्ग है

और हम अपने दिलों में खिल उठे हैं।

परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए हम सत्य को जीते हैं

और हमारे दिलों में शांति है।

हम परमेश्वर के न्याय से गुज़रते हैं

और वह हमारी भ्रष्टता को शुद्ध कर रहा है।

उसका धर्मी स्वभाव बहुत प्यारा है।

हमने परमेश्वर के सच्चे प्रेम को चखा है

और उसके महान उद्धार को हासिल किया है।

जब हम स्तुति करते हैं और उसकी गवाही देते हैं,

तो हम धन्य होते हैं।

स्तुति करो, खुश हो जाओ! परमेश्वर विजयी होकर लौटा है।

स्तुति करो, खुश हो जाओ! परमेश्वर विजयी होकर लौटा है।


III

परमेश्वर ने शैतान को हराया है

और विजेताओं का एक समूह बनाया है।

बड़े लाल अजगर को पूरी तरह से

अपमानित कर परास्त किया गया है।

परमेश्वर के कार्य मानवजाति के

लिए सम्पूर्णता से प्रकट किये गए हैं।

हम देखते हैं कि परमेश्वर बहुत बुद्धिमान और सर्वशक्तिमान है।

निश्चित रूप से, अपने उद्धार के माध्यम से

परमेश्वर मानवजाति को महान अनुग्रह दिखाता है।

पूरी तरह से आश्वस्त होकर,

हम दिलोजान से उपासना में झुकते हैं।

हम सर्जित प्राणी उसे अनंत समय तक प्रेम करेंगे

और उसके प्रति समर्पित रहेंगे।

स्तुति करो, खुश हो जाओ! परमेश्वर विजयी होकर लौटा है।

स्तुति करो, खुश हो जाओ! परमेश्वर विजयी होकर लौटा है।

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