486 परमेश्वर के वचनों से खुद को लैस करना तुम्हारी सर्वोच्च प्राथमिकता है

1

परमेश्वर के वचनों में तुम देख सकते हो,

परमेश्वर के काम को, जान सकते हो असलियत को।

केवल उसके वचनों में पा सकते हो प्रबुद्धता,

उसके वचनों से तुम्हें इसलिए खुद को लैस करना चाहिए।

उसके वचनों के बारे में तुम अपनी समझ को साझा करो।

अगर लोग पा सकें तुम्हारी संगति से रोशनी,

अगर इसके ज़रिये तुम दिखा सको उन्हें रास्ता सही,

तो ये रास्ता है असल, है व्यवहारिक।


तुम्हारे लिए सबसे ज़रूरी काम है खुद को परमेश्वर के वचनों से लैस करना।

इससे पहले कि ईश्वर तुम्हारे लिए परिवेश बनाये तुम्हें ये करना होगा।


2

सबसे पहले उसके वचनों को तुम खाओ-पियो।

जो काम नहीं कर पाते हो तुम उसके लिए,

उसके वचनों में अभ्यास का पथ खोजो, उनमें मुश्किलों का हल ढूंढो।

परमेश्वर के सभी वचनों को अपनी आपूर्ति बनाओ,

उन्हें तुम्हारी व्यवहारिक मुश्किलों का हल करने दो,

उसके वचनों को तुम्हारे जीवन का सहारा बनने दो।

इसके लिए तुम दिल से करो प्रयास।


तुम्हारे लिए सबसे ज़रूरी काम है खुद को परमेश्वर के वचनों से लैस करना।

इससे पहले कि ईश्वर तुम्हारे लिए परिवेश बनाये तुम्हें ये करना होगा।


3

नतीजे पाने के लिए ईश-वचनों को खाओ-पियो,

ईश्वर के सामने आना, दिल को शांत करना सीखो।

कठिनाई जो आये तो उसके वचन अनुसार काम करो;

जो हो न कोई कठिनाई तो, बस वचनों को खाओ-पियो।


और कभी करो प्रार्थना, सोचो ईश्वर के प्रेम को,

साझा करो उसके वचनों के ज्ञान को, अपने भीतर की प्रबुद्धता को,

उसके वचनों के प्रति अपने भावों को,

लोगों को अनुसरण का पथ पाने में मदद करो

ये सारी बातें व्यवहारिक हैं।

इन बातों का लक्ष्य है, परमेश्वर के वचनों को अपनी आपूर्ति बनाना।


तुम्हारे लिए सबसे ज़रूरी काम है खुद को परमेश्वर के वचनों से लैस करना।

इससे पहले कि ईश्वर तुम्हारे लिए परिवेश बनाये तुम्हें करना होगा ये।


—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर से सचमुच प्रेम करने वाले लोग वे होते हैं जो परमेश्वर की व्यावहारिकता के प्रति पूर्णतः समर्पित हो सकते हैं से रूपांतरित

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