60 अंत के समय का परमेश्वर का धार्मिक न्याय मनुष्य को वर्गीकृत करता है

1 युग का समापन करने के अपने अंतिम कार्य में, परमेश्वर का स्वभाव ताड़ना और न्याय का है, जिसमें, सार्वजनिक रूप से सभी लोगों का न्याय करने, और उन लोगों को सिद्ध बनाने के लिए, जो एक ईमानदार हृदय से उसे प्यार करते हैं, वह सब कुछ प्रकट करता है जो अधार्मिक है। केवल इस तरह का एक स्वभाव ही युग का समापन कर सकता है। अंत के दिन पहले ही आ चुके हैं। सृष्टि की सभी चीज़ों को उनके प्रकार के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा, और उनकी प्रकृति के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। यही वह क्षण है जब परमेश्वर लोगों के परिणाम और उनकी मंज़िल को प्रकट करता है। यदि लोग ताड़ना और न्याय से नहीं गुज़रते हैं, तो उनकी अवज्ञा और अधार्मिकता को प्रकट करने का कोई तरीका नहीं होगा। केवल ताड़ना और न्याय के माध्यम से ही सभी सृजनों का अंत प्रकट हो सकता है। मनुष्य केवल तभी अपने वास्तविक रंगों को दिखाता है जब उसे ताड़ना दी जाती है और उसका न्याय किया जाता है। दुष्ट को दुष्ट के साथ, भले को भले के साथ रखा जाएगा, और समस्त मानव जाति को उनके प्रकार के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा।

2 ताड़ना और न्याय के माध्यम से, सभी सृजनों का अंत प्रकट किया जाएगा, ताकि दुष्ट को दंडित किया जा सके और अच्छे को पुरस्कृत किया जा सके, और सभी लोग परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन हो जाएँगे। यह समस्त कार्य धार्मिक ताड़ना और न्याय के माध्यम से अवश्य प्राप्त किया जाना चाहिए। क्योंकि मनुष्य की भ्रष्टता अपने चरम पर पहुँच गई है और उसकी अवज्ञा अत्यंत गंभीर हो गई है, इसलिए केवल परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव ही, जो मुख्यत: ताड़ना और न्याय से संयुक्त है और जो अंत के दिनों में प्रकट होता है, मनुष्य को रूपान्तरित और पूर्ण बना सकता है। केवल यह स्वभाव ही दुष्टता को उजागर कर सकता है और इस तरह सभी अधार्मिकों को गंभीर रूप से दण्डित कर सकता है। इसलिए, इस तरह का स्वभाव युग के महत्व से सम्पन्न होता है, और उसके स्वभाव का प्रकटन और प्रदर्शन प्रत्येक नए युग के कार्य के वास्ते अभिव्यक्त किया जाता है। ऐसा नहीं है कि परमेश्वर अपने स्वभाव को मनमाने ढंग से और महत्व के बिना प्रकट करता है।

3 माना कि, जब अंत के दिनों के दौरान मनुष्य का परिणाम प्रकट करने में, मनुष्य को धार्मिक न्याय के अधीन नहीं करके, बल्कि इसके बजाय उसके प्रति सहिष्णुता, धैर्य और क्षमा दर्शाते हुए, और चाहे मनुष्य का पाप कितना ही गंभीर क्यों न हो उसे माफ़ करते हुए, रत्ती भर भी धार्मिक न्याय के बिना, परमेश्वर अभी भी मनुष्य पर अनन्त करुणा और प्रेम प्रदान करता और उसके प्रति प्रेममय रहना जारी रखता: तब परमेश्वर के समस्त प्रबंधन का कभी भी कब अंत किया जाता? इस तरह का कोई स्वभाव कब मानव जाति की उचित मंज़िल में अगुआई करने में सक्षम होगा? अंत के दिनों के दौरान, केवल धार्मिक न्याय ही मनुष्य का उसके प्रकार के अनुसार वर्गीकरण कर सकता है और मनुष्य को एक नए राज्य में ला सकता है। इस तरह, परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के धार्मिक स्वभाव के माध्यम से समस्त युग का अंत किया जाता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3)" से रूपांतरित

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