219 हे परमेश्वर! मैं तुम्हारे प्रेम के लायक नहीं हूँ

इतने सारे आँसू बहाए मैंने।

इतना दर्द सहा मैंने।

इतनी लंबी सड़कों पर चला मैं।

कितनी बार लाभ और घाटे की गिनती की मैंने।

कितनी बार मेरी इच्छाएं हुई चूर-चूर।

अक्सर परमेश्वर को छोड़ने के बारे में सोचा मैंने।

लेकिन उसका प्रेम रखता था मुझे करीब,

उसकी उंगलियाँ पकड़कर रखती थी मुझे।

शिथिलता से दूर ले जाते हुए मुझे।

एक-एक कदम करके दूर ले जाते हुए मुझे।

अक्सर मैं मुँह फेरकर जाने के लिए निकल पड़ता/पड़ती था/थी,

लेकिन उसका प्रेम रखता था मुझे करीब।

उसके वचन मेरी पापी आत्मा को तोड़ देते थे,

अपनी शर्म के साथ छिपने के लिए कोई जगह नहीं छोड़ देते थे।

अक्सर मुझे संदेह हुआ, मैं गया भटक।

शैतान के प्रलोभन का विरोध कर पाया नहीं मैं।

कितनी बार प्रसिद्धि और हैसियत की तलाश में रहा मैं।

ज़िद्दी मैंने, कभी भी उन्हें छोड़ने का प्रयास किया नहीं।

हे परमेश्वर, मैं यही हूँ!

मैं तुम्हारे प्रेम, तुम्हारी मुक्ति के लायक नहीं हूं।

अगर तुम्हारे वचनों ने की नहीं होती रहनुमाई और मार्गदर्शन,

तो मैं एक कदम आगे बढ़ा सकता नहीं था।

शिथिलता से दूर ले जाते हुए मुझे।

एक-एक कदम करके दूर ले जाते हुए मुझे।

अक्सर मैं मुँह फेरकर जाने के लिए निकल पड़ता/पड़ती था/थी,

लेकिन उसका प्रेम रखता था मुझे करीब।

तुम मुझे अपना जीवन और सच्चाई देते हो।

अब बचा लिया है तुमने मुझे।

हे परमेश्वर! अब मैं शिथिल नहीं हूँ,

पीछे हटूंगा/हटूंगी नहीं मैं।

मैं सच्चाई को अभ्यास में लाऊंगा/लाऊंगी,

तुम्हारे वचन के अनुसार जीवन जिऊँगा/जिऊंगी।

हे परमेश्वर! मुझे ताड़ना और न्याय दो,

मुझे शुद्ध करो,

उद्धार के लिए मुझे स्वच्छ करो।

शिथिलता से दूर ले जाते हुए मुझे।

एक-एक कदम करके दूर ले जाते हुए मुझे।

शिथिलता से दूर ले जाते हुए मुझे।

एक-एक कदम करके दूर ले जाते हुए मुझे।

अक्सर मैं मुँह फेरकर जाने के लिए निकल पड़ता/पड़ती था/थी,

लेकिन उसका प्रेम रखता था मुझे करीब।

तुम मुझे अपना जीवन और सच्चाई देते हो।

अब बचा लिया है तुमने मुझे।

शिथिलता से दूर ले जाते (दूर ले जाते) हुए मुझे।

शिथिलता से दूर ले जाते (दूर ले जाते) हुए मुझे।

तुम मुझे अपना जीवन और सच्चाई देते हो।

अब बचा लिया है तुमने मुझे।

अब बचा लिया है तुमने मुझे।

पिछला: 215 मोआब के वंशजों की ओर से परमेश्वर की स्तुति

अगला: 198 सत्य को समझकर मुक्त हो जाओ

दुनिया आपदा से घिर गई है। यह हमें क्या चेतावनी देती है? आपदाओं के बीच हम परमेश्वर द्वारा कैसे सुरक्षित किये जा सकते हैं? इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारे साथ हमारी ऑनलाइन मीटिंग में जुड़ें।
WhatsApp पर हमसे संपर्क करें
Messenger पर हमसे संपर्क करें

संबंधित सामग्री

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

Iपूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने,हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

Iसमझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग,सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के लिए...

वचन देह में प्रकट होता है अंत के दिनों के मसीह के कथन (संकलन) अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर उपदेश और वार्तालाप अंत के दिनों के मसीह के लिए गवाहियाँ परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-सूची

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें