219 हे परमेश्वर! मैं सचमुच तेरे प्रेम का हकदार नहीं हूँ

1

मैंने ऐसे बहुत-से काम किए हैं जिन्हें याद करना मैं सहन नहीं कर पाता।

मैंने बहुत सारा समय बर्बाद कर दिया,

और मेरे दिल में पश्चाताप और कृतज्ञता की कितनी ही भावनाएं उमड़ रही हैं।

अपने-आपको परमेश्वर के लिए खपाने और कष्ट उठाने के बदले में मैंने हमेशा पुरस्कारों की कामना की।

जब उन आशीषों को पाने की इच्छाएं पूरी नहीं हुईं, तो मैंने परमेश्वर को छोड़ने का मन बना लिया,

लेकिन उसका प्रेम अभी भी मेरे मन में एकदम स्पष्ट था और उसे भुलाना मुश्किल था।

परमेश्वर के वचनों ने मेरे दिल को झकझोरा,

और धीरे-धीरे मुझे पतन और निराशा से बाहर निकाला।

जब मुश्किलें आईं तो मैं डर गया, कायर बन गया और कमजोर पड़ गया।

कमजोरी और निराशा के पलों में, मैंने एक बार फिर परमेश्वर को छोड़ने की सोची।

उसके वचनों ने मेरे दिल को जैसे दुधारी तलवार से चीर दिया,

और मेरे लिए कोई ऐसी जगह न छोड़ी जहाँ मैं शर्म से मुँह छिपा सकूँ।


2

मैं शोहरत, दौलत और हैसियत के पीछे भागा करता था,

और शैतान के प्रलोभनों से बच नहीं पाता था।

कितनी ही बार मैं चिंतित हुआ, झिझका और अपने जीवन की दिशा खो बैठा।

मैं पापों में लिपटा जूझता रहा, नहीं जानता था कि उनसे कैसे पीछा छुड़ाऊँ।

हे परमेश्वर! मैं कितना विद्रोही हूं और मैंने तेरा दिल दुखाया है।

इतनी भ्रष्टता को देखते हुए, मैं सचमुच तेरे उद्धार के काबिल नहीं हूँ।

हे परमेश्वर! तेरे वचन मुझे हमेशा राह दिखाते हैं और मेरा मार्गदर्शन करते हैं,

वरना तो मैं प्रलोभनों में फंसकर, छोटे से छोटा कदम उठाने के लिए भी संघर्ष करता रहता।

हे परमेश्वर! अब मैं न तो दोबारा कभी भी निराश होऊँगा और न ही पीछे हटूंगा।

तू मेरा त्याग मत करना; मैं तेरे बिना जी नहीं सकता।

हे परमेश्वर! मैं तेरी ताड़ना, न्याय और शुद्धिकरण के लिए प्रार्थना करता हूँ,

ताकि मेरी भ्रष्टता दूर हो सके और मैं एक इंसान की तरह जी सकूं।

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