761 क्या तुममें परमेश्वर के लिए सच्चा प्रेम है?

1 यदि तुम परमेश्वर को देह के कल्याण के लिए या क्षणिक आनंद के लिए प्रेम करते हो, तो भले ही, अंत में, परमेश्वर के लिए तुम्हारा प्रेम अपने शिखर पर पहुँच जाए और तुम इससे ज़्यादा और कुछ भी ना माँगो, तुम्हारे द्वारा खोजा जाने वाला यह प्रेम अशुद्ध प्रेम ही है, और यह परमेश्वर को प्रसन्न करने वाला प्रेम नहीं है। वे लोग जो परमेश्वर के प्रति प्रेम का उपयोग अपने नीरस जीवन को समृद्ध बनाने और अपने हृदय के खालीपन को भरने के लिए करते हैं, ये वे हैं जिन्हें अपना जीवन आसानी से जीने का लालच है, ना कि वे जो सच में परमेश्वर को प्रेम करना चाहते हैं। इस प्रकार का प्रेम जबरन होता है, यह मानसिक संतुष्टि की खोज में किया जाता है, और परमेश्वर को इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। तो फिर, तुम्हारा प्रेम कैसा है? तुम परमेश्वर को किस लिए प्रेम करते हो? इस समय तुम्हारे भीतर परमेश्वर के लिए कितना सच्चा प्रेम है?

2 तुम लोगों में से अधिकांश का प्रेम वैसा ही है जिसका पहले ज़िक्र किया गया था। इस प्रकार का प्रेम सिर्फ़ यथास्थिति को बरकरार रख सकता है; अनन्त स्थिरता को प्राप्त नहीं कर सकता, न ही मनुष्य में जड़ें जमा सकता है। इस प्रकार का प्रेम सिर्फ़ एक ऐसे फूल की तरह है जो खिलता है पर फल दिए बिना ही मुरझा जाता है। दूसरे शब्दों में, एक बार जब तुमने परमेश्वर को इस तरीके से प्रेम कर लिया और यदि तुम्हें इस मार्ग पर आगे ले जाने वाला कोई नहीं है, तो तुम्हारा पतन हो जाएगा। यदि तुम परमेश्वर को सिर्फ़ परमेश्वर को प्रेम करने के समय ही प्रेम कर सकते हो लेकिन उसके बाद तुम्हारे जीवन की प्रकृति में कोई बदलाव नहीं आता, तो फिर तुम अंधकार के प्रभाव से बचकर नहीं निकल पाओगे, और शैतान के बंधन और चालबाज़ी से खुद को मुक्त नहीं कर पाओगे।

3 ऐसा कोई भी मनुष्य परमेश्वर को पूरी तरह से प्राप्त नहीं हो सकता; आखिरकार, उसकी आत्मा, प्राण, और शरीर शैतान के ही रहेंगे। यह असंदिग्ध है। वे सभी जो पूरी तरह से परमेश्वर को प्राप्त नहीं हो पाएँगे, अपने मूल स्थान अर्थात वापस शैतान के पास लौट जाएँगे, और वे परमेश्वर के दंड के अगले चरण को स्वीकार करने के लिये, उस झील में जायेंगे जो आग और गंधकाश्म से जलती रहती है। परमेश्वर को वे प्राप्त होते हैं, जो शैतान को त्याग देते हैं और उसके अधिकार क्षेत्र से बच निकलते हैं। उन्हें राज्य के लोगों में आधिकारिक रूप से गिना जाता है। इस तरह से राज्य के लोग अस्तित्व में आते हैं। क्या तुम इस प्रकार के व्यक्ति बनना चाहते हो? क्या तुम परमेश्वर को प्राप्त होना चाहते हो? क्या तुम शैतान के अधिकार क्षेत्र से बचना और वापस परमेश्वर के पास जाना चाहते हो? क्या तुम अब शैतान के हो या तुम राज्य के लोगों में गिने जाते हो?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए' से रूपांतरित

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