1023 परमेश्वर और मनुष्य के लिए अलग-अलग विश्राम स्थल

1 जब परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे, तो इसका अर्थ होगा कि मानवता को बचा लिया गया है और शैतान का विनाश हो चुका है, कि मनुष्यों के बीच परमेश्वर का कार्य पूरी तरह समाप्त हो गया है। परमेश्वर मनुष्यों के बीच अब और कार्य नहीं करता रहेगा और वे वेअब शैतान के अधिकार क्षेत्र में और नहीं रहेंगे। वैसे तो, परमेश्वर अब और व्यस्त नहीं रहेगा और मनुष्य लगातार गतिमान नहीं रहेंगे; परमेश्वर और मानवता एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर अपने मूल स्थान पर लौट जाएगा और प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने स्थान पर लौट जाएगा। ये वे गंतव्य हैं, जहाँ परमेश्वर का समस्त प्रबंधन पूरा होने पर परमेश्वर और मनुष्य रहेंगे।

2 परमेश्वर के पास परमेश्वर की मंज़िल है, और मानवता के पास मानवता की। विश्राम करते समय, परमेश्वर पृथ्वी पर सभी मनुष्यों के जीवन का मार्गदर्शन करता रहेगा, जबकि वे उसके प्रकाश में, स्वर्ग के एकमात्र सच्चे परमेश्वर की आराधना करेंगे। परमेश्वर अब मानवता के बीच और नहीं रहेगा, न ही मनुष्य परमेश्वर के साथ उसके गंतव्य में रहने में समर्थ होंगे। परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक ही क्षेत्र के भीतर नहीं रह सकते; बल्कि दोनों के जीने के अपने-अपने तरीक़े हैं। परमेश्वर वह है, जो समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता है और समस्त मानवता परमेश्वर के प्रबंधन-कार्य का ठोस स्वरूप है। मनुष्य वे हैं, जिनकी अगुआई की जाती है और वे परमेश्वर के सार के समान नहीं हैं।

3 मनुष्य के विश्राम का स्थान पृथ्वी है और परमेश्वर के विश्राम का स्थान स्वर्ग में है। जब मनुष्य विश्राम में परमेश्वर की आराधना करते हैं, वे पृथ्वी पर रहेंगे और जब परमेश्वर बाकी मानवता को विश्राम में ले जाएगा, वह स्वर्ग से उनका नेतृत्व करेगा न कि पृथ्वी से। परमेश्वर तब भी पवित्र आत्मा ही होगा, जबकि मनुष्य तब भी देह होंगे। परमेश्वर और मनुष्य दोनों अलग ढंग से विश्राम करते हैं। जब परमेश्वर विश्राम करता है, वह मनुष्यों के बीच आएगा और प्रकट होगा; जबकि मनुष्यों को विश्राम के दौरान स्वर्ग की यात्रा करने और साथ ही वहाँ के जीवन का आनंद उठाने के लिए परमेश्वर द्वारा अगुआई की जाएगी।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे' से रूपांतरित

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