244 परमेश्वर की अवहेलना करने से सिर्फ़ दंड मिल सकता है

इंसान को बचाने की ख़ातिर बनाए गये,

अपने प्रबंधन की पूर्ति के लिए

ईश्वर ने हज़ारों साल काम किया है,

वो अनेक युगों से गुज़रा है।

वो देखना न चाहे विरोध उनका

जिन्हें वो बचाए,

न उनसे धोखा पाना चाहे

जिन्होंने कभी उसके

अनुग्रह का आनंद लिया।

ईश-विरोध का नतीजा सज़ा है।

कोई इससे बच न सके।

ये ईश्वर का स्वभाव है,

दुष्टों से निपटने का सही तरीका।

ईशनिंदा, ईश्वर से धोखा

करने से मिले सज़ा।

ऐसा पहले भी था। अब भी है।

आगे भी होगा।

यही शाश्वत सत्य है।

वो ज़्यादा लोगों को बचाने के लिए करे।

उसके मन-मुताबिक बनकर,

उसकी इच्छा को समझें,

ताकि उसके राज्य में आकर,

उसके वादे का आनंद लें।

उसे अपने परिवार में अवज्ञा से

सबसे ज़्यादा नफरत है।

अपने विरोधियों को सज़ा और

शाप देने के अलावा,

ईश्वर के पास और चारा ही क्या है?

उसकी अवज्ञा करने वालों के ख़िलाफ

इससे बेहतर रवैया और क्या हो सके?

उसकी सज़ा को मानने के अलावा

ऐसे लोगों के पास और

विकल्प ही क्या है?

ईश-विरोध का नतीजा सज़ा है।

कोई इससे बच न सके।

ये ईश्वर का स्वभाव है,

दुष्टों से निपटने का सही तरीका।

ईशनिंदा, ईश्वर से धोखा

करने से मिले सज़ा।

ऐसा पहले भी था। अब भी है।

आगे भी होगा।

यही शाश्वत सत्य है।

— "सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के विरोध हेतु दण्‍ड के विशिष्ट उदाहरण" के 'अंतभाषण' से रूपांतरित

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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