621 स्वभाव बदले बिना कोई परमेश्वर की सेवा नहीं कर सकता

ईश्वर की सेवा नहीं काम सरल,

न पाओगे तुम उसकी सेवा का मौका

एक भ्रष्ट स्वभाव के साथ

जो बदला नहीं गया है।

1

अगर तुम्हारे स्वभाव का नहीं हुआ न्याय,

ईश-वचनों द्वारा नहीं हुई ताड़ना,

तो तुम्हारा स्वभाव शैतान को दर्शाता है,

और साबित करे कि तुम्हारी ईश-सेवा तुम्हारे अपने हित के लिए है,

और तुम्हारी शैतानी प्रकृति से यह उपजी है।

कुदरती स्वभाव से करना ईश्वर की सेवा, जैसे भी तुम करना चाहो,

यह सोचकर कि ईश्वर उसमें खुश है जो तुम करना चाहो

और नापसंद करता जो तुम न करना चाहो,

तुम्हारा काम तुम्हारी पसंद पर टिका है, तो कैसे मानें इसे ईश्वर की सेवा?

2

अंत में, तुम्हारा स्वभाव नहीं बदल पायेगा,

तुम और भी जिद्दी बन जाओगे।

तुम्हारी भ्रष्टता और ज़्यादा गहरी होगी,

ईश्वर की तुम्हारी सेवा का आधार होगा तुम्हारा चरित्र और अनुभव।

यह है फलसफा इंसान का।

इस तरह के लोग फरीसी हैं, वो धर्माधिकारी हैं।

अगर होश में आकर न पछताए वो,

बन जाएंगे वो झूठे मसीह, और मसीह विरोधी,

जिनके बारे में कहा गया कि अंत के दिनों में दिखाई देंगे।

ईश्वर की सेवा नहीं काम सरल,

न पाओगे तुम उसकी सेवा का मौका

एक भ्रष्ट स्वभाव के साथ जो बदला नहीं गया है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'धार्मिक सेवाओं का शुद्धिकरण अवश्य होना चाहिए' से रूपांतरित

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