प्रश्न 3: प्रभु यीशु ने खुद कहा था कि बाइबल उनकी गवाही है। इसीलिए प्रभु में हमारी आस्था की बुनियाद बाइबल ही होनी चाहिए। प्रभु को जानने का हमारा एकमात्र मार्ग बाइबल ही है।

उत्तर: तो फिर आइए देखें कि बाइबल की बुनियाद पर क्या कोई प्रभु को सही ढंग से जान सकता है। इस सवाल का जवाब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन में पाया जा सकता है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "उस समय के सभी यहूदियों ने पुराने विधान से पढ़ा था और यशायाह की भविष्यवाणी को जानते थे कि चरनी में एक नर शिशु जन्म लेगा। तो फिर क्यों, इस ज्ञान के साथ, उन्होंने तब भी यीशु को सताया? क्या यह उनकी विद्रोही प्रकृति और पवित्र आत्मा के कार्य के प्रति अज्ञानता के कारण नहीं है? उस समय, फरीसियों को विश्वास था कि यीशु का कार्य उससे भिन्न था जो वे भविष्यवाणी किए गए नर शिशु के बारे में जानते थे; आज का मनुष्य परमेश्वर को अस्वीकार करता है क्योंकि देहधारी परमेश्वर का कार्य बाइबल के अनुरूप नहीं है। क्या परमेश्वर के विरुद्ध उनके विद्रोहीपन का सार एक ही बात नहीं है? …अगर कोई कार्य पवित्रात्मा का है, तो बिना बाइबल के प्रमाण की आवश्यकता के, तुम्हें उसे स्वीकार कर लेना चाहिये, जब तक कि यह पवित्र आत्मा का है, क्योंकि तुम परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए परमेश्वर पर विश्वास करते हो, न कि उसकी जाँच-पड़ताल करने के लिए। मेरे यह दिखाने के लिए कि मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ तुम्हें और सबूत नहीं खोजने चाहिए। इसके बजाय कि तुम्हें यह विचार करना चाहिए कि क्या मैं तुम्हारे लिए लाभ का हूँ, यही मुख्य बात है। भले ही तुम्हें बाइबल में बहुत सारे अखंडनीय सबूत प्राप्त हो जाएँ; ये तुम्हें पूरी तरह से मेरे सामने नहीं ला सकते हैं। तुम एक ऐसे व्यक्ति हो जो बाइबल के सीमा में ही रहता है, न कि मेरे सामने; बाइबल मुझे जानने में तुम्हारी सहायता नहीं कर सकती है, न ही यह मेरे लिए तुम्हारे प्रेम को गहरा कर सकती है। यद्यपि बाइबल में भविष्यवाणी की गई है कि एक नर शिशु जन्म लेगा, कोई थाह नहीं ले सकता है कि किस पर यह भविष्यवाणी घटित होगी, क्योंकि मनुष्य को परमेश्वर का कार्य नहीं पता, और फरीसियों का यीशु के विरोध में खड़े होने का यही कारण है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है?")। व्यवस्था के युग में लोग धर्मग्रंथों को पकड़े हुए थे, और उन्होंने परमेश्वर के नये कार्य की न तो खोज की और न ही उसकी जांच-पड़ताल की। आखिर में, उन लोगों ने प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ा दिया। इस सच्चाई से हम समझ सकते हैं कि सिर्फ बाइबल की बुनियाद पर हम परमेश्वर को या उनके कार्य को नहीं जान सकते। हम सभी जानते हैं कि उन दिनों, प्रभु यीशु का अनुसरण करनेवाले लोग प्रभु यीशु के वास्तविक कार्य और वचनों और पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता और मार्गदर्शन की बुनियाद पर परमेश्वर को जानना चाहते थे। एक भी इंसान बाइबल की बुनियाद पर परमेश्वर को नहीं जान पाया। यह सच है। भाइयो और बहनो, हम भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को मापने के पैमाने के रूप में, सिर्फ बाइबल का उपयोग नहीं कर सकते। बाइबल को सिर्फ एक संदर्भ के रूप में लिया जा सकता है। अहम बात यह पक्का करना है कि यह सत्य और पवित्र आत्मा के कार्य पर आधारित है या नहीं। सिर्फ तभी सही फैसला लिया जा सकता है।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने वचन के जरिये हमसे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं। "आज, हर कोई बाइबल में अंत के दिनों के कार्य की भविष्यवाणियों का पता लगाना चाहता है, वह यह खोज करना चाहता है कि अंत के दिनों के दौरान परमेश्वर क्या कार्य करता है, और अंत के दिनों के लिए क्या लक्षण हैं। इस तरह से, बाइबल की उनकी आराधना और उत्कट हो जाती है, और यह जितना ज़्यादा अंत के दिनों के नज़दीक आती है, उतना ही ज़्यादा वे बाइबल की भविष्यवाणियों को विश्वसनीयता देने लगते हैं, विशेषकर उनको जो अंत के दिनों के बारे में हैं। बाइबल में ऐसे अन्धे विश्वास के साथ, बाइबल में ऐसे भरोसे के साथ, उनमें पवित्र आत्मा के कार्य को खोजने की कोई इच्छा नहीं होती है। लोगों की अवधारणाओं के अनुसार, वे सोचते हैं कि केवल बाइबल ही पवित्र आत्मा के कार्य को ला सकती है; केवल बाइबल में ही वे परमेश्वर के पदचिह्नों को खोज सकते हैं; केवल बाइबल में ही परमेश्वर के कार्य के रहस्य छिपे हुए हैं; केवल बाइबल—न कि अन्य पुस्तकें या लोग—परमेश्वर के बारे में हर बात को और उनके कार्य की सम्पूर्णता को स्पष्ट कर सकती है; बाइबल स्वर्ग के कार्य को पृथ्वी पर ला सकती है; और बाइबल युगों का आरंभ और अंत दोनों कर सकती है। इन अवधारणाओं के साथ, लोगों का पवित्र आत्मा के कार्य को खोजने की ओर कोई झुकाव नहीं होता है। अतः, इस बात की परवाह किए बिना कि अतीत में बाइबल लोगों के लिए कितनी मददगार थी, यह परमेश्वर के नीवनतम कार्य के लिए एक बाधा बन गई है। बाइबल के बिना, लोग अन्य स्थानों पर परमेश्वर के पदचिह्नों को खोज सकते हैं, फिर भी आज, उसके कदमों को बाइबल के द्वारा "रोक लिया" गया है, और उनके नवीनतम कार्य को बढ़ाना दोगुना कठिन, और एक कठिन संघर्ष बन गया है। यह सब बाइबल के प्रसिद्ध अध्यायों एवं कथनों, और साथ ही बाइबल की विभिन्न भविष्यवाणियों की वजह से हैं" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (1)")। "चूँकि हम परमेश्वर के पदचिन्हों को खोज रहे हैं, हमें अवश्य ही परमेश्वर की इच्छा, परमेश्वर के वचन, परमेश्वर के कथन की खोज करनी चाहिए; क्योंकि जहां परमेश्वर के नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है, और जहां परमेश्वर के पदचिन्ह हैं, वहाँ परमेश्वर के कार्य हैं। जहां परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर का प्रकट होना है, और जहां परमेश्वर का प्रकट होना है,वहाँ मार्ग, सत्य और जीवन का अस्तित्व है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है")। सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने वचन के जरिये हमसे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हमें परमेश्वर में विश्वास करते वक्त जिद्दी होकर बाइबल को नहीं पकड़े रखना चाहिए और पवित्र आत्मा के कार्य की निशानियों के साथ कदम मिलाकर चलना चाहिए और उनके नये कार्य और वचनों में परमेश्वर के कदमों की निशानियाँ खोजनी चाहिए। यह पक्का करने के लिए कि यह परमेश्वर का कार्य और सच्चा मार्ग है या नहीं, हमें देखना होगा कि इसमें पवित्र आत्मा का कार्य है या नहीं, इसमें सत्य व्यक्त हुआ है या नहीं, और क्या यह लोगों को जीवन का पोषण दे सकता है। अगर जो व्यक्त हुआ है वह सत्य और जीवन है, तो यह बेशक परमेश्वर का कार्य है, और पवित्र आत्मा ने उसकी पुष्टि की होगी। अगर हम परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को जानना चाहते हैं, तो हमें परमेश्वर के वचनों और कथनों के भीतर खोज और जांच-पड़ताल करनी होगी, कि क्या ये परमेश्वर की अभिव्यक्ति हैं, क्या ये नये युग में लोगों को आगे की दिशा दिखा सकते हैं, क्या उनमें सत्य है, क्या वे लोगों को जीवन का पोषण दे सकते हैं, और क्या वे लोगों के भ्रष्ट स्वभाव को उनके शुद्धिकरण पाने के लिए बदल सकते हैं। सिर्फ यही वह मानक है, जिससे सच्चे मार्ग को जांचा जा सकता है! भाइयो और बहनो, हमें परमेश्वर के नये युग के कथनों और वचनों पर गौर करना चाहिए!

"बाइबल के बारे में रहस्य का खुलासा" फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

पिछला: प्रश्न 2: बाइबल के सत्य पहले ही पूर्ण हैं। परमेश्वर में हमारी आस्था के लिए हमारे पास बाइबल का होना काफी है।हमें और कोई नये वचन नहीं चाहिए!

अगला: प्रश्न 4: इन्होंने कहा कि किताब परमेश्वर का नया वचन है! प्रकाशित वाक्य में स्पष्ट कहा गया है: "मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूँ: यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्‍वर उन विपत्तियों को, जो इस पुस्तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा" (प्रकाशितवाक्य 22:18)। इनकी बातें बाइबल के अलावा हैं।

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प्रश्न 27: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं?

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