428 परमेश्वर के सामने शांत कैसे रहें

1 यदि तुम सचमुच अपने हृदय को परमेश्वर के समक्ष शांत करना चाहते हो, तो तुम्हें सावधानी के साथ सहयोग का कार्य करना होगा। कहने का अर्थ यह है कि तुममें से प्रत्येक को अपने व्यक्तिगत आत्मिक भक्तिमय समयों के लिए हर व्यक्ति, विषय, और वस्तु से अपने आपको कुछ समय के लिए अलग करना होगा, जहाँ तुम अपने हृदय में शांति प्राप्त कर सकोगे और परमेश्वर के समक्ष स्वयं को शांत कर सकोगे। तुम्हें अपने व्यक्तिगत भक्तिमय समयों के नोट्स लिखने चाहिए जहाँ तुम परमेश्वर के वचन के अपने ज्ञान को लिख सको और यह भी कि किस प्रकार तुम्हारी आत्मा प्रेरित हुई है, इसकी परवाह किए बिना कि जो तुमने लिखा है वह गंभीर है या सतही। एक इच्छा के साथ परमेश्वर के सामने अपने हृदय को शांत करो।

2 यदि तुम दिन के दौरान एक या दो घंटे एक सच्चे आत्मिक जीवन के प्रति समर्पित कर सकते हो तो उस दिन तुम्हारा जीवन समृद्ध अनुभव करेगा और तुम्हारा हृदय चमकदार और स्पष्ट होगा। यदि तुम प्रतिदिन इस प्रकार के आत्मिक जीवन को जीते हो तब तुम अपना हृदय अधिक से अधिक परमेश्वर को दे सकोगे, तुम्हारी आत्मा और अधिक सामर्थी हो जाएगी, तुम्हारी स्थिति बेहतर होती जाएगी, तुम पवित्र आत्मा की अगुवाई वाले मार्ग पर चलने के और अधिक योग्य हो सकोगे, और परमेश्वर तुम्हें और अधिक से अधिक आशीषें देगा। आरंभ में, तुम शायद इस विषय में ज्यादा कुछ प्राप्त न कर पाओ, परंतु तुम्हें अपने आपको नकारात्मकता में पीछे हटने या लड़खड़ाने की अनुमति नहीं देनी है—तुम्हें कठिन परिश्रम करते रहना है!

3 जितना अधिक आत्मिक जीवन तुम जीओगे, उतना अधिक तुम्हारा हृदय परमेश्वर के वचनों से भरा रहेगा, इन विषयों के साथ हमेशा संबंधित रहेगा और हमेशा इस बोझ को रखेगा। उसके बाद, तुम अपने आत्मिक जीवन के द्वारा अपने भीतर छुपे सत्यों को परमेश्वर के सामने प्रकट कर सकते हो, उसे बता सकते हो कि तुम क्या करना चाहते हो, तुम किस विषय में सोच रहे हो, परमेश्वर के वचनों के बारे में अपनी समझ और उनके बारे में अपने दृष्टिकोण बता सकते हो। कुछ भी न छुपाओ, थोडा सा भी नहीं! अपने मन में परमेश्वर से वचनों को कहने का प्रयास करो, सच बताओ, और वह बोलने से न हिचको जो तुम्हारे मन में है।

4 जितना अधिक तुम यह करते हो उतना अधिक तुम परमेश्वर की मनोहरता का अनुभव करोगे, और तुम्हारा हृदय भी परमेश्वर की ओर अधिक से अधिक आकर्षित होगा। जब ऐसा होता है, तो तुम अनुभव करोगे कि किसी और की अपेक्षा परमेश्वर तुम्हें अधिक प्रिय है। फिर चाहे कुछ भी हो जाए, तुम कभी भी परमेश्वर के साथ को नहीं छोड़ोगे। यदि प्रतिदिन तुम इस प्रकार का आत्मिक भक्तिमय समय बिताओ और इसे अपने मन से बाहर न निकालो, बल्कि इसे अपने जीवन की बुलाहट मानो, तो परमेश्वर का वचन तुम्हारे हृदय को भर देगा। जैसे कि तुम्हारे हृदय में हमेशा प्रेम रहा हो। कोई भी तुमसे उसे छीन नहीं सकता। जब यह होता है, तो परमेश्वर सचमुच तुम्हारे भीतर वास करेगा और तुम्हारे हृदय में अपना निवास बनाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "एक सामान्य आत्मिक जीवन लोगों की सही मार्ग पर अगुवाई करता है" से रूपांतरित

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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