135 परमेश्वर का कार्य सदा नया होता है कभी पुराना नहीं होता

I

अनुग्रह के युग में पीछे रह गया था

यहोवा का काम, कहा था यीशु ने कभी।

उसी तरह पीछे रह गया है यीशु का काम

है आज मेरा यही बयान।

सिर्फ़ व्यवस्था का युग होता,

अगर अनुग्रह का युग न होता,

तो यीशु को सूली पर न चढ़ाया गया होता,

और उसने इंसान को छुटकारा न दिलाया होता।

ईश्वर उसी काम को कभी दोहराता नहीं,

बदलता रहता है उसका काम,

जैसे मैं हर दिन नए वचन बोलता हूँ,

नया काम करता हूँ।

ये है वो काम जो मैं करता हूँ,

और इसमें जो सबसे मुख्य बात है

वो है परमेश्वर के "नए" और "अद्भुत" वचन।

और इसमें जो सबसे मुख्य बात है

वो है परमेश्वर के "नए" और "अद्भुत" वचन।


II

अगर सिर्फ़ व्यवस्था का युग होता,

तो क्या इंसान आज इतना विकसित होता?

क्या ये कुदरती नियम नहीं है ईश्वर के काम का।

कि इतिहास रुके न कभी आगे बढ़ता है?

क्या ये ईश्वर द्वारा कायनात में

इंसान के प्रबंधन का चित्रण नहीं है?

बदलती रहती है ईश्वर की इच्छा निरंतर;

इतिहास बढ़ता है तो, ईश्वर का काम भी बढ़ता है।

ईश्वर 6000 साल तक वही काम नहीं करेगा;

परमेश्वर का काम कभी पुराना नहीं,

सदा नया होता है,

सदा नया होता है।

एक बार सलीब पर चढ़कर क्या वो,

बनाए रख सकता था इस काम को सदा के लिये?

दो बार सलीब पर चढ़कर?

ये केवल बेतुके इंसान की समझ है।

ईश्वर उसी काम को कभी दोहराता नहीं,

बदलता रहता है उसका काम,

जैसे मैं हर दिन नए वचन बोलता हूँ,

नया काम करता हूँ।

ये है वो काम जो मैं करता हूँ,

और इसमें जो सबसे मुख्य बात है

वो है परमेश्वर के "नए" और "अद्भुत" वचन।

और इसमें जो सबसे मुख्य बात है

वो है परमेश्वर के "नए" और "अद्भुत" वचन।


III

"ईश्वर बदलता नहीं, सदा वही रहेगा";

ये कहावत वास्तव में सच्ची है।

ईश्वर का सार कभी नहीं बदलता,

वो कभी शैतान नहीं बन सकता।

पर इससे साबित नहीं होता उसके सार की तरह,

उसका काम भी नित्य और अचल है।

अगर ईश्वर बदलता नहीं, तो कैसे समझाओगे

वो सदा नया रहता है पुराना नहीं होता?

ईश्वर का काम सदा फैलता है,

ईश्वर का काम सदा बदलता है।

ईश्वर की इच्छा इंसान को बताई जाती है,

ईश्वर की इच्छा सदा ज़ाहिर की जाती है।


"वचन देह में प्रकट होता है" से

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