137 परमेश्वर के सारा काम अत्यंत व्यवाहरिक है

1 परमेश्वर अपने कार्य में, प्रत्यक्ष रूप से व्यक्त करता है कि वह क्या है; वह किसी योजना को बनाने पर मगजपच्ची नहीं करता है। वह जो भी कार्य करता है वह सब सर्वाधिक वास्तविक कार्य होता है। वह प्रत्येक युग के विकास के अनुसार अपने कार्य को संपन्न करता है, और यह इस बात पर आधारित होता है कि चीज़ें कैसे बदलती हैं। उसके लिए, कार्य को संपन्न करना किसी बीमारी के लिए दवा देने के सदृश है; अपना कार्य करते समय वह अवलोकन करता है और अपने अवलोकनों के अनुसार कार्य जारी रखता है। अपने कार्य के प्रत्येक चरण में, परमेश्वर अपनी प्रचुर बुद्धि और अपनी योग्यता को व्यक्त करने में सक्षम है; वह किसी युग विशेष के कार्य के अनुसार अपनी प्रचुर बुद्धि और अधिकार को प्रकट करता है, और उस युग के दौरान अपने द्वारा वापस लाए गए सभी लोगों को अपना समस्त स्वभाव देखने देता है।

2 प्रत्येक युग में जिस कार्य के किए जाने की आवश्यकता है उसके अनुसार वह लोगों की आवश्यकताओं की आपूर्ति करता है, वह सब कार्य जो उसे करना चाहिए। वह लोगों की आवश्यकताओं की आपूर्ति इस आधार पर करता है कि शैतान ने उन्हें किस हद तक भ्रष्ट कर दिया है। इस तरह, जबसे उसने संसार का सृजन किया है, वह नए-नए कार्य में लगा रहा है और उसके कार्य का कोई भी कदम कभी भी दोहराया नहीं गया है। शैतान ने लगातार षड्यंत्र किए हैं; मानवजाति लगातार शैतान के द्वारा भ्रष्ट की गई है, और यहोवा परमेश्वर ने अपने बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य को लगातार संपन्न किया है। वह कभी भी असफल नहीं हुआ है, और संसार के सृजन से लेकर अब तक उसने कार्य करना कभी नहीं रोका है। शैतान द्वारा मानवजाति को भ्रष्ट करने के बाद से, परमेश्वर अपने उस शत्रु को परास्त करने के लिए उनके बीच लगातार कार्य करता रहा है जो भ्रष्टता का स्रोत है। यह लड़ाई आरंभ से शुरू हुई है और संसार के अंत तक चलती रहेगी।

3 यह सब कार्य करते हुए, यहोवा परमेश्वर ने न केवल शैतान द्वारा भ्रष्ट की जा चुकी मनुष्यजाति को अपने द्वारा महान उद्धार को प्राप्त करने की अनुमति दी है, बल्कि उसे अपनी बुद्धि, सर्वशक्तिमत्ता और अधिकार को देखने की अनुमति भी दी है। इसके अलावा, अंत में वह मानवजाति को दुष्टों को दंड, और अच्छों को पुरस्कार देने वाला अपना धार्मिक स्वभाव देखने देगा। उसने आज के दिन तक शैतान के साथ युद्ध किया है और कभी भी पराजित नहीं हुआ है। इसलिए, क्योंकि वह एक बुद्धिमान परमेश्वर है, वह अपनी बुद्धि शैतान के षड्यंत्रों के आधार पर प्रयोग करता है। और इसलिए परमेश्वर न केवल स्वर्ग की सब चीजों से अपने अधिकार का पालन करवाता है; बल्कि वह पृथ्वी की सभी चीज़ों को अपने पाँव रखने की चौकी के नीचे रखवाता है, और एक अन्य महत्वपूर्ण बात है, वह दुष्टों को, जो मानवजाति पर आक्रमण करते हैं और उसे सताते हैं, अपनी ताड़ना के अधीन करता है। इन सभी कार्यों के परिणाम उसकी बुद्धि के कारण प्राप्त होते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई' से रूपांतरित

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