137 परमेश्वर का समस्त कार्य परम व्यावहारिक है

1

ईश्वर अपने कार्य में अपना स्वरूप दर्शाए;

इसकी योजना में ज़्यादा दिमाग न लगाए।

उसका काम सबसे असल काम है।

ये आधारित है कि कैसे चीज़ें बदलें, कैसे युग विकास करे।

ईश्वर के लिए काम करना है जैसे किसी रोग का इलाज करना।

अपने काम पर नज़र रखे, उसके अनुसार काम जारी रखे।

ईश्वर हर चरण के काम के अनुसार

प्रचुर बुद्धि और सामर्थ्य दिखाए,

उस युग के जिन लोगों को वो वापस लाया है

उन्हें अपना समस्त स्वभाव दिखाए।

हर युग के अपने काम के अनुसार ईश्वर इंसान की ज़रूरतें पूरी करे,

इस आधार पर कि वो शैतान के हाथों कितना भ्रष्ट हुआ है।

सृजन के समय से उसने नया काम किया है, कभी कोई काम दोहराया नहीं है।

शैतान साज़िश रचे, इंसान को भ्रष्ट करे,

जबकि ईश्वर बारंबार बुद्धिमत्तापूर्ण काम करे।

2

वो कभी न नाकाम हुआ,

न छोड़ा सृजन के समय से काम करना।

जब से इंसान शैतान द्वारा भ्रष्ट हुआ, ईश्वर उनके बीच काम कर रहा है,

ताकि इंसान को भ्रष्ट करने वाले शत्रु को हराए,

दुनिया के अंत तक ये जंग चलती रहेगी।

ईश्वर इन तमाम कामों से इंसान का महान उद्धार करे,

इंसान को वो अपनी बुद्धि, अधिकार और सर्वशक्तिमत्ता दिखाए।

अंत में वो उसे अपना धार्मिक स्वभाव दिखाएगा—

अच्छे को इनाम और बुरे को दंड देगा।

शैतान के षड्यंत्रों के मुताबिक वो अपनी बुद्धि का प्रयोग करे।

वो शैतान के साथ अपनी जंग में कभी नाकाम नहीं हुआ है।

ईश्वर स्वर्ग की हर चीज़ को अपने अधिकार के आगे झुकाए;

वो धरती की सभी चीज़ें पाँव की चौकी तले रखे,

वो इंसान पर हमला करने, सताने वालों को

अपनी ताड़ना के अधीन आने को मजबूर करे।

ईश-कार्य के तमाम फल उसकी बुद्धि के कारण हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई' से रूपांतरित

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