790 परमेश्वर की इच्छा खुली रही है सबके लिए

1

इन्सान के सृजन से,

परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,

इन्सान के सृजन से,

परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,

रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।

2

परमेश्वर ने जानकर अपना सार छुपाया नहीं कभी,

न अपना स्वभाव, न इच्छा ही।

चूँकि इन्सान नहीं देता उसके कार्य, इच्छा पर ध्यान,

इन्सान की परमेश्वर के बारे में समझ है अति कमज़ोर।

इन्सान के सृजन से,

परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,

रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।

3

मायने हैं इसके कि जब परमेश्वर अपना व्यक्तित्व छुपाता है,

वो इन्सान के साथ ही हर समय खड़ा रहता है,

हर पल अपनी इच्छा, स्वभाव और सार प्रकट करता है।

एक अर्थ में, परमेश्वर का व्यक्तित्व सबके लिए खुला है।

चूँकि इन्सान अनाज्ञाकारी और अँधा है,

परमेश्वर के प्रकटन को वो देख नहीं पाता है,

परमेश्वर के प्रकटन को देख नहीं पाता है।

इन्सान के सृजन से,

परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,

रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I' से रूपांतरित

पिछला: 789 तुम्हें जानना चाहिए परमेश्वर को उसके कार्य द्वारा

अगला: 791 सभी चीज़ों पर परमेश्वर के प्रभुत्व द्वारा परमेश्वर को जानो

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

संबंधित सामग्री

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें