958 कार्यों के लिए परमेश्वर के सिद्धांत नहीं बदलते

1 परमेश्वर हर वस्तु, हर व्यक्ति, और सभी जीवित चीज़ों के बीच जो उसने सृजित की हैं, अपनी सँभाल में, उनके प्रति अपने दृष्टिकोण में, प्रबंधन में, प्रशासन में, और उन पर शासन में न्यायपरायण और उत्तरदायी है, और इसमें वह कभी भी लापरवाह नहीं रहा है। जो अच्छे हैं, वह उनके प्रति कृपापूर्ण और दयावान है; जो दुष्ट हैं, उन्हें वह निर्दयता से दंड देता है; और विभिन्न जीवित प्राणियों के लिए, वह समयबद्ध और नियमित तरीके से, विभिन्न समयों पर मनुष्य संसार की विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार उचित व्यवस्थाएँ करता है, इस तरह से कि ये विभिन्न जीवित प्राणी उन भूमिकाओं के अनुसार जो वे निभाते हैं व्यवस्थित रूप से जन्म लेते रहें, और एक विधिवत तरीके से भौतिक जगत और आध्यात्मिक दुनिया के बीच चलते रहें। चाहे आध्यात्मिक दुनिया हो या भौतिक संसार, परमेश्वर जिन सिद्धांतों पर काम करता है, वे बदलते नहीं हैं। इस बात की परवाह किए बिना कि तुम परमेश्वर के कार्यकलापों को देख सकते हो या नहीं, उसके सिद्धांत नहीं बदलते हैं। हमेशा से ही, सभी चीजों के प्रति परमेश्वर का दृष्टिकोण और सभी चीज़ों को सँभालने के उसके सिद्धांत एक ही रहे हैं। यह अपरिवर्तनशील है।

2 परमेश्वर अविश्वासियों में से उन लोगों के प्रति दयालु रहेगा जो अपेक्षाकृत सही तरीके से जीते हैं, और हर धर्म में से उन लोगों के लिये अवसर बचाकर रखेगा जो सद्व्यवहार करते हैं और दुष्टता नहीं करते हैं, उन्हें परमेश्वर द्वारा प्रबंधन की गई सभी चीज़ों में एक भूमिका निभाने देगा, और वह करने देगा जो उन्हें करना चाहिए। इसी प्रकार, उन लोगों के बीच जो परमेश्वर का अनुसरण करते हैं, उन लोगों के बीच जो उसके चुने हुए हैं, परमेश्वर इन सिद्धांतों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करता है। जो कोई भी ईमानदारी से उसका अनुसरण कर पाता है, वह उसके प्रति दयालु है, और उस हर एक को प्रेम करता है जो ईमानदारी से उसका अनुसरण करता है। केवल इतना ही है कि इन विभिन्न प्रकार के लोगों—अविश्वासियों, विभिन्न आस्थाओं वाले लोगों और परमेश्वर के चुने हुए लोगों—के लिए वह जो उन्हें प्रदान करता है, वह भिन्न होता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X' से रूपांतरित

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