959 परमेश्वर के स्वभाव को भड़काने के परिणाम

1 परमेश्वर का उन लोगों के साथ व्यवहार जो उसकी निंदा करते हैं या उसका प्रतिरोध करते हैं उन लोगों के साथ भी उसका व्यवहार जो उसे बदनाम करते हैं—जो लोग जानबूझकर उस पर हमला करते हैं, उसे बदनाम करते हैं, और उसे कोसते हैं—वह उनकी ओर आँख या कान बंद नहीं करता है। उनके प्रति उसका एक स्पष्ट रवैया होता है। वह इन लोगों से घृणा करता है, अपने हृदय में उनकी निन्दा करता है। यहाँ तक कि उनके परिणाम की खुल कर घोषणा भी करता है, ताकि लोग जानें कि जो उसकी निंदा करते हैं उनके प्रति उसका एक स्पष्ट रवैया है, और ताकि वे जानें कि वह उनका कैसा परिणाम निर्धारित करता है।

2 कुछ लोगों के दुष्ट व्यवहार से निपटने के लिए परमेश्वर तथ्यों के आगमन का उपयोग करता है। जब ये तथ्य घटित होते हैं, तो लोगों की देह कष्ट भुगतती है; यह सब कुछ ऐसा है जिसे मनुष्य की आँखों से देखा जा सकता है। कुछ लोगों के दुष्ट व्यवहार से निपटते समय, परमेश्वर बस वचनों से शाप देता है, परन्तु साथ ही, परमेश्वर का क्रोध उनके ऊपर पड़ता है, और वह दण्ड जिसे वे प्राप्त करते हैं वह कुछ ऐसा हो सकता है जिसे लोग देख नहीं सकते हैं, परन्तु इस प्रकार का परिणाम उन परिणामों से कहीं ज़्यादा गंभीर हो सकता है जिसे लोग देख सकते हैं कि उन्हें दण्डित किया या मारा जा रहा है।

3 इसलिए जब लोग परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं, और उसे बदनाम करते हैं और उसकी ईशनिंदा करते हैं, तो यदि वे उसके स्वभाव को भड़काते हैं, या यदि वे परमेश्वर की सहनशीलता की सीमा तक पहुँच जाते हैं, तो परिणाम अकल्पनीय होते हैं। सबसे कठोर परिणाम यह होता है कि परमेश्वर हमेशा के लिए उनकी ज़िन्दगियों और उनकी हर चीज़ को शैतान को सौंप देता है। वे पूरी अनंतता तक क्षमा नहीं किए जाएँगे। इसका अर्थ है कि ऐसे व्यक्ति शैतान के मुँह का निवाला, और उसके हाथ का खिलौना बन चुके हैं, और उस समय के बाद से परमेश्वर का उनके साथ कुछ लेना-देना नहीं है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" से रूपांतरित

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