885 इंसान को बचाने के कार्य के पीछे परमेश्वर के सच्चे इरादे

अंत के दिनों के कार्य के चरण में,

इंसान ने देखा है ईश-प्रेम, उसका न्याय और ताड़ना।

ईश्वर इंसान को पोषण दे, सहारा दे, प्रबुद्ध करे, मार्ग दिखाए,

जिससे इंसान उसके इरादों को देखे

और देखे वो सत्य, जो वो इंसान को प्रदान करे।

1

ईश्वर न करे सदा अनुशासित और ताड़ित,

न वो हमेशा सहिष्णुता और धैर्य दिखाए।

बल्कि वो अलग-अलग तरीकों से भरण-पोषण करे हर इंसान का,

उनके अपने चरणों में, उनके आध्यात्मिक कद और गुण के मुताबिक।

वो इंसान के लिए बहुत कुछ करे बड़ी कीमत पर, जिसे इंसान न देख सके।

2

ईश-प्रेम वास्तविक है : ईश्वर के अनुग्रह से इंसान बार-बार आपदा से बचता।

और बार-बार ईश्वर इंसान की कमज़ोरी सहे।

वो न्याय करता, ताड़ना देता, जिससे लोग इंसान की भ्रष्टता जान सकें।

वो समझ पाएँगे, इंसान का सार शैतानी है।

ईश्वर का मार्गदर्शन, उसकी दी चीज़ें, इंसान को सत्य का सार दिखाएँ,

जिससे वे जानेंगे लोगों की ज़रूरत, कौन-सा मार्ग उन्हें लेना चाहिए,

क्या है जीवन का मूल्य और अर्थ, और मार्ग पर कैसे चलना चाहिए।

3

ईश्वर के कार्य करने का तरीका एक निरंतर प्रयास है

इंसान के हृदय को जगाने का जिससे इंसान जान सके,

कौन करे उसका मार्गदर्शन और पोषण, इंसान कहाँ से आया,

किसने उसे अब तक जीवित रखा, कौन है स्रष्टा और किसकी करें पूजा।

जिससे इंसान जान सके किस मार्ग पर है चलना

और ईश्वर के सामने कैसे है आना।

ये सब इंसान के हृदय को पुनर्जीवित करने के लिए है,

जिससे इंसान जाने, ईश-हृदय में क्या है,

जिससे इंसान समझ सके, उस परवाह और विचार को

जो है पीछे ईश-कार्य के, जिसे वो इंसान को बचाने के लिए करे।

4

जब इंसान का हृदय जागे, इंसान न चाहे जीना भ्रष्ट स्वभाव के साथ,

बल्कि ईश्वर को संतुष्ट करने सत्य को खोजे।

तब वो सक्षम होंगे शैतान से मुक्त होने में और नुकसान से बचने में।

शैतान सब नियंत्रण खो देगा, इंसान अब और ना ठगा जाएगा।

इसके बजाय इंसान सहयोग देगा ईश-कार्य और उसके वचनों में,

ईश-हृदय को संतुष्ट करने के लिए, वो ईश्वर का भय मानेगा, बुराई त्याग देगा।

इसीलिए ईश्वर ने अपना कार्य शुरू किया।

इसीलिए ईश्वर ने अपना कार्य शुरू किया।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI' से रूपांतरित

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