857 मानवजाति के प्रति परमेश्वर की करुणा निरंतर बहती है

"तब यहोवा ने कहा,

जिस रेंड़ के पेड़ के लिये

तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया,

जो एक ही रात में हुआ,

और एक ही रात में नष्‍ट भी हुआ;

उस पर तू ने तरस खाई है।

फिर यह बड़ा नगर नीनवे,

जिसमें एक लाख बीस हज़ार से अधिक मनुष्य हैं

जो अपने दाहिने बाएँ हाथों का भेद नहीं पहिचानते,

और बहुत से घरेलू पशु भी उसमें रहते हैं,

तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊँ?"


"सृष्टिकर्ता की करुणा"

कोई खाली जुमला नहीं है, न ही खोखला वादा है।

इसमें सिद्धांत और उद्देश्य हैं,

ये है सच्ची और वास्तविक बिन किसी भेस के।

उसकी दया बिन रुके मानव जाति को प्रदान की जाती है।

पर योना के साथ सृष्टिकर्ता का वचन

उसका विशिष्ट कथन दर्शाता है, क्यों वो दयालु है,

और कैसे वो दया दिखाता है,

वो मानवता के प्रति कितना सहनशील है,

और मानव के प्रति उसकी सच्ची भावना को।

ईश्वर का क्रोध अक्सर मानव पर उतरता है,

पर उसकी दया कभी न ख़त्म होती है।

करुणा से, वो मानव का मार्गदर्शन, अगुवाई,

आपूर्ति और पोषण करता है,

पीढ़ी दर पीढ़ी, एक युग से अगले युग तक।

उसका मानव के प्रति प्यार नहीं बदलता है,

उसका प्यार कभी न बदलेगा!

उसका मानव के प्रति प्यार नहीं बदलता है,

उसका प्यार कभी न बदलेगा!


यहोवा परमेश्वर का वार्तालाप

दर्शाता है मानव के लिए उसके सम्पूर्ण विचार को,

वो है उसके दिल की एक अभिव्यक्ति और

मानव के लिए अपार करुणा का सबूत है।

उसकी दया केवल पुरखों के लिए नहीं बल्कि युवा वर्ग के लिए भी है,

हमेशा की तरह ये पीढ़ी दर पीढ़ी रहेगा।

ईश्वर का क्रोध अक्सर मानव पर उतरता है,

पर उसकी दया कभी न ख़त्म होती है।

करुणा से, वो मानव का मार्गदर्शन, अगुवाई,

आपूर्ति और पोषण करता है,

पीढ़ी दर पीढ़ी, एक युग से अगले युग तक।

उसका मानव के प्रति प्यार नहीं बदलता है,

उसका प्यार कभी न बदलेगा!

ईश्वर का क्रोध अक्सर मानव पर उतरता है,

पर उसकी दया कभी न ख़त्म होती है।

करुणा से, वो मानव का मार्गदर्शन, अगुवाई,

आपूर्ति और पोषण करता है,

पीढ़ी दर पीढ़ी, एक युग से अगले युग तक।

उसका मानव के प्रति प्यार नहीं बदलता है,

उसका प्यार कभी न बदलेगा!

उसका मानव के प्रति प्यार नहीं बदलता है,

उसका प्यार कभी न बदलेगा!


"वचन देह में प्रकट होता है" से रूपांतरित

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