682 परमेश्वर मनुष्य को कई तरह से पूर्ण बनाता है

1 प्रत्येक व्यक्ति में पालन करने के लिए पवित्र आत्मा एक मार्ग है और प्रत्येक व्यक्ति को सिद्ध होने का अवसर प्रदान करता है। तुम्हारी नकारात्मकता के द्वारा ही तुम्हें तुम्हारी भ्रष्टता दिखाई गई है, और फिर नकारात्मकता को उतार फेंकने के द्वारा तुम अभ्यास करने के लिए एक मार्ग प्राप्त करोगे, और यही तुम्हारी सिद्धता है। और निरन्तर मार्गदर्शन और तुम में कुछ सकारात्मक बातों को रोशन करने के द्वारा तुम अपने कार्य को अग्रसक्रियता से पूर्ण करोगे और अंतर्दृष्टि में विकास करोगे और पहचानने की योग्यता प्राप्त करोगे। जब तुम्हारी परिस्थितियाँ अनूकूल होती हैं, तुम विशेषतः परमेश्वर के वचन पढ़ने और परमेश्वर से प्रार्थना करने इच्छुक होते हो, और जो उपदेश तुम सुनते हो, उसे अपनी अवस्था से सम्बद्ध कर सकते हो। ऐसे समयों में परमेश्वर तुम्हें भीतर से प्रबुद्ध और रोशन करता है, और तुम्हें सकारात्मक पहलू वाली कुछ बातें एहसास कराता है। यह सकारात्मक पहलू तुम्हारी सिद्धता है।

2 नकारात्मक परिस्थितियों में, तुम दुर्बल और नकारात्मक होते हो, और तुम्हें महसूस होता है कि तुम्हारे दिल में परमेश्वर नहीं है, फिर भी परमेश्वर तुम्हें रोशन करता और अभ्यास करने के लिए एक मार्ग खोजने में तुम्हारी सहायता करता है। इससे बाहर आ जाना नकारात्मक पहलू में सिद्धता प्राप्त करना है। परमेश्वर मनुष्य को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं में सिद्ध बना सकता है। यह इस पर निर्भर करता है, कि तुम अनुभव करने के योग्य हो और क्या तुम परमेश्वर के द्वारा सिद्ध किए जाने की कोशिश करते हो। यदि तुम सचमुच परमेश्वर के द्वारा सिद्ध किए जाने की कोशिश करते हो, तब नकारात्मक तुम्हारी हानि नहीं कर सकता, परन्तु तुम्हारे लिए वे बातें ला सकता है, जो अधिक वास्तविक हैं, और तुम्हें यह जानने के लिए और अधिक योग्य बना सकता है, कि तुम्हारे भीतर क्या कमी है, तुम अपनी वास्तविक परिस्थतियों को अधिक समझने में, और यह देखने योग्य बना सकता है कि मनुष्य के पास कुछ नहीं है; और मनुष्य कुछ नहीं है; यदि तुम परीक्षाओं को अनुभव नहीं करते, तुम नहीं जानते, और तुम सर्वदा महसूस करोगे कि तुम दूसरों से ऊपर हो और प्रत्येक व्यक्ति से उत्तम हो। इस सब के द्वारा तुम देखोगे कि जो कुछ पहले हुआ था वह परमेश्वर के द्वारा किया और सुरक्षित रखा गया था।

3 परीक्षाओं में प्रवेश तुम्हें प्रेम या विश्वास रहित बना देता है, तुम्हें प्रार्थना की कमी होती है, और तुम भजन गाने में असमर्थ होते हो और अनजाने में ही तुम इन सब के मध्य में स्वयं को जान लेते हो। परमेश्वर के पास मनुष्य को सिद्ध बनाने के अनेक साधन हैं। मनुष्य के भ्रष्ट स्वभाव से निपटने के लिए वह समस्त प्रकार के वातावरण का प्रयोग करता है, और मनुष्य को अनावृत करने के लिए विभिन्न चीजों का प्रयोग करता है, एक ओर वह मनुष्य के साथ निपटता है और दूसरी ओर मनुष्य को अनावृत करता है, और एक अन्य बात में वह मनुष्य के हृदय के गहन रहस्यों को खोदकर और ज़ाहिर करते हुए, और मनुष्य को उसकी अनेक अवस्थाएँ दिखा करके उसका स्वभाव दर्शाते हुए मनुष्य को प्रकट करता है। परमेश्वर अनेक विधियों—प्रकाशन, व्यवहार करने, शुद्धिकरण, और ताड़ना—के द्वारा मनुष्य को सिद्ध बनाता है, जिससे मनुष्य जान सके कि परमेश्वर व्यावहारिक है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "मात्र वे लोग जो अभ्यास करने पर केन्द्रित रहते हैं, उन्हें ही सिद्ध बनाया जा सकता है" से रूपांतरित

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