1026 परमेश्वर हर तरह के मनुष्य के लिए उपयुक्त व्यवस्थाएं करता है

1 जब हम इसका विचार करते हैं, तो इस बात की परवाह किए बिना कि मानवजाति में कितनी नस्लें शामिल हैं, समस्त मानवजाति परमेश्वर का सृजन है। लोग चाहे किसी भी नस्ल से संबंधित हों, वे सब उसका सृजन हैं; वे सब आदम और हव्वा के वंशज हैं। लोग चाहे किसी भी श्रेणी से संबंधित हों, वे सभी उसके प्राणी हैं; चूँकि वे मनुष्य जाति से संबंधित हैं जिसका सृजन परमेश्वर ने किया था, इसलिए उनकी नियति वही है जो मानवजाति की होनी चाहिए, और वे उन नियमों के कारण विभाजित हैं जो मानवजाति को संगठित करते हैं। कहने का अर्थ है, कि बुरा करने वाले और धार्मिक लोग अंततः प्राणी ही हैं। वे प्राणी जो बुरा करते हैं अंततः नष्ट हो जाएँगे, और वे प्राणी जो धार्मिक कर्म करते हैं वे फलस्वरूप जीवित बचे रहेंगे। इन दो प्रकार के प्राणियों के लिए यह सर्वथा उपयुक्त व्यवस्था है।

2 परमेश्वर का कार्य समाप्त हो जाने के बाद, उसके सभी प्राणियों में, वे लोग होंगे जो नष्ट किए जाएँगे और वे होंगे जो जीवित बचे रहेंगे। यह उसके प्रबंधन कार्य की एक अपरिहार्य प्रवृत्ति है। इस से कोई भी इनकार नहीं कर सकता है। कुकर्मी लोग जीवित नहीं बच सकते हैं; जो लोग अंत तक उसका आज्ञापालन और अनुसरण करते हैं वे निश्चित रूप से जीवित बचेंगे। चूँकि यह कार्य मानवजाति के प्रबंधन का है, इसलिए कुछ होंगे जो बचे रहेंगे और कुछ होंगे जो नष्ट कर दिए जाएँगे। ये अलग-अलग प्रकार के लोगों के अलग-अलग परिणाम है और उसके प्राणियों के लिए सबसे अधिक उपयुक्त व्यवस्थाएँ हैं।

3 मानवजाति के लिए परमेश्वर का अंतिम प्रबंधन परिवारों को ध्वस्त करके, देशों को ध्वस्त करके और राष्ट्रीय सीमाओं को ध्वस्त करके विभाजित करना है। यह परिवारों और राष्ट्र की सीमाओं के बिना एक है, क्योंकि, अंततः, मनुष्य एक ही पूर्वज का है, और परमेश्वर का सृजन है। संक्षेप में, कुकर्मी प्राणी नष्ट कर दिए जाएँगे, और जो परमेश्वर का आज्ञापालन करते हैं, वे जीवित बचेंगे। इस तरह, शेष भविष्य में कोई परिवार नहीं होगा, कोई देश नहीं होगा, विशेषरूप से कोई राष्ट्र नहीं होगा; इस प्रकार की मानवजाति सबसे अधिक पवित्र प्रकार की मानवजाति होगी।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" से रूपांतरित

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