174 देहधारी परमेश्वर ही बचा सकता है इंसान को पूरी तरह

1

किसी आत्मा के ज़रिये या आत्मा के रूप में

नहीं आता परमेश्वर इंसान को बचाने,

जिसे कोई देख न पाए, छू न पाए, न जिस तक इंसान पहुँच पाए।

परमेश्वर गर बचाता इंसान को रूह की तरह, न कि सृजित इंसान की तरह,

तो उससे न कोई उद्धार पाता, न ही कोई बच पाता।

परमेश्वर बनता है एक सृजित मानव, रखता है देह में अपने वचन।

ताकि वो प्रदान कर सके अनुयायियों को अपने वचन।

ताकि इंसान सुन सके, देख सके, पा सके उसके वचन।

इसके ज़रिये इंसान को सचमुच बचाया जा सकता है उसके पापों से।

2

गर परमेश्वर देहधारी न होता, तो किसी इंसान को बचाना मुमकिन न होता,

और महान उद्धार परमेश्वर का, किसी को न मिलता।

गर परमेश्वर का आत्मा काम करता इंसान में,

तो वो शैतान के हाथों मार दिया गया होता,

या बंधक बना लिया गया होता,

क्योंकि परमेश्वर के आत्मा को इंसान छू नहीं सकता,

क्योंकि परमेश्वर के आत्मा को इंसान छू नहीं सकता।

स्वर्ग से प्रार्थना करके नहीं पाता इंसान उद्धार,

चूँकि इंसान शरीर है, इसलिये पाता है देहधारी परमेश्वर से उद्धार।

वो न देख सकता है, न पहुँच सकता है परमेश्वर के आत्मा तक।

वो जुड़ सकता है सिर्फ़ देहधारी परमेश्वर से।

उसी के ज़रिये समझता है सत्य वो और पाता है पूरा उद्धार।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देहधारण का रहस्य (4)' से रूपांतरित

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