868 इंसान को बचाने के लिये ख़ामोशी से कार्य करता है देहधारी परमेश्वर

I

देहधारण कर, अपना नया काम करने की ख़ातिर,

हमें भ्रष्टता से बचाने की ख़ातिर,

इंसानों के बीच छिपकर रहता,

कोई सफ़ाई नहीं देता है, परमेश्वर।

अपनी बनाई योजनाओं के मुताबिक,

कदम-दर-कदम काम करता है परमेश्वर।

दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं उसके वचन,

तसल्ली देते हैं, डाँटते हैं, ख़बरदार करते हैं उसके वचन।

कोमल, करुणामय से लेकर, प्रखर और प्रतापी हैं उसके वचन।

दया दिखाते हैं, भय से कंपाते भी हैं उसके वचन।

हमारे गहरे राज़ उजागर करके,

शर्मिंदा कर सकते हैं, बेध सकते हैं हमें उसके वचन।

आपूर्ति अनंत है उसके जीवन-जल की।

रूबरू परमेश्वर के, बदौलत उसकी रहते हैं हम।

देहधारण कर, अपना नया काम करने की ख़ातिर,

हमें भ्रष्टता से बचाने की ख़ातिर,

इंसानों के बीच छिपकर रहता,

कोई सफ़ाई नहीं देता है, परमेश्वर।

अपनी बनाई योजनाओं के मुताबिक,

कदम-दर-कदम काम करता है परमेश्वर।

II

आभारी हैं हम स्वर्ग में प्रभु यीशु की कृपा के

ग़ौर नहीं किया हमने इस दिव्यता से युक्त

मामूली इंसान के जज़्बात पर कभी।

न सोचा कभी हमने इसके बारे में।

काम करता है वो, दीनता से देह में,

अपने दिल की वो, आवाज को व्यक्त करते हुए

इस बात से बेख़बर दिखता हुआ कि नामंज़ूर उसे किया है इंसान ने,

बचपने और नादानी को इंसान के, लगे यूं, वो हमेशा माफ़ करता है,

इंसान से हुए अनादर के प्रति, सहनशील वो हमेशा ही रहता है।

देहधारण कर, अपना नया काम करने की ख़ातिर,

हमें भ्रष्टता से बचाने की ख़ातिर, इंसानों के बीच छिपकर रहता,

कोई सफ़ाई नहीं देता है, परमेश्वर।

अपनी बनाई योजनाओं के मुताबिक,

कदम-दर-कदम काम करता है परमेश्वर।

III

उसके वचनों में है जीवन का बल,

चलने का तरीका सिखाते हैं,

उसके वचन से हम सत्य जान पाते हैं।

उस मामूली इंसान के वचन से खिंचे,

हम ग़ौर करते हैं, उसके लहजे और दिल की आवाज़ पे।

हर कोशिश करता है, अपने दिल का लहू बहाता है वो।

हमारे लिये आँसू बहाता है, आहें भरता है वो,

शर्मिंदगी उठाता है हमारी तकदीर और उद्धार के लिये

हमारे विद्रोहीपन के लिये रोता है, लहू बहाता है उसका दिल।

ऐसे स्वरूप और स्वभाव और सहनशीलता से

मिलान नहीं कर सकता है दूजा कोई।

ना हासिल कर सकता था

ऐसा प्रेम और सब्र कोई सृजन।

देहधारण कर, अपना नया काम करने की ख़ातिर,

हमें भ्रष्टता से बचाने की ख़ातिर,

इंसानों के बीच छिपकर रहता,

कोई सफ़ाई नहीं देता है, परमेश्वर।

अपनी बनाई योजनाओं के मुताबिक,

कदम-दर-कदम काम करता है परमेश्वर।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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