272 दुनिया में इंसान का अंत लाता ईश्वर

1

ईश्वर के अंत के दिनों का न्याय नहीं कुछ लोगों के लिए,

है ये इंसान को ईश-स्वभाव दिखाने के लिए।

मगर वक्त की कमी, ज़्यादा काम की वजह से,

ईश-स्वभाव से ईश्वर को न जान पाया इंसान।

आगे बढ़े ईश्वर अपनी नयी योजना, अंतिम काम में।

उसे देखने वाले अपनी छाती पीटेंगे रोएँगे क्योंकि मौजूद है वो।

दुनिया में इंसान का अंत लाता ईश्वर।

सबके सामने प्रकट होता उसका स्वभाव,

जो जानें, या न जानें उसे देखते धरती पर उसका आगमन।

ये ईश-योजना है, उसकी "स्वीकारोक्ति" है मानव-सृजन के समय से।

2

ईश्वर चाहे तुम सब उसकी तरफ ध्यान दो,

पूरी लगन से उसका हर काम देखो

क्योंकि उसकी छड़ी पड़े हर उस इंसान पर

और जो उसका, उसका विरोध करे। जो उसका विरोध करे।

आगे बढ़े ईश्वर अपनी नयी योजना, अंतिम काम में, अंतिम काम में।

उसे देखने वाले अपनी छाती पीटेंगे रोएँगे क्योंकि मौजूद है वो।

दुनिया में इंसान का अंत लाता ईश्वर।

सबके सामने प्रकट होता उसका स्वभाव,

जो जानें, या न जानें उसे देखते धरती पर उसका आगमन।

ये ईश-योजना है, उसकी "स्वीकारोक्ति" है।

ये ईश-योजना है, उसकी "स्वीकारोक्ति" है मानव-सृजन के समय से।

ईश्वर के अंत के दिनों का न्याय नहीं कुछ लोगों के लिए,

है ये इंसान को ईश-स्वभाव दिखाने के लिए, ईश-स्वभाव दिखाने के लिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो' से रूपांतरित

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