291 सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रेम परम निर्मल है

1

हे परमेश्वर! तूने देहधारण करके, इंसान को बचाने के लिये हर चीज़ का त्याग कर दिया है।

तूने कभी भी इंसान के स्नेह का अनुभव नहीं किया है या इंसान के दिल को हासिल नहीं किया है।

तू दुनिया की सारी कड़वाहट का स्वाद चख चुका है, चुपचाप दशकों से काम कर रहा है।

तूने जो वचन व्यक्त किए हैं वे सभी सत्य हैं जो इंसान को अनंत जीवन देने के लिए हैं।

मगर लोग इस बात को जानते नहीं, वे तेरा तिरस्कार और तुझे बदनाम करते हैं, तेरे उद्धार को नकारते हैं।

तूने अपमान सहा है फिर भी तू लोगों को अपने प्रेम से द्रवित करता है, यथासंभव इंसान को बचाता है।

हे परमेश्वर! तूने अपना समस्त प्रेम निस्वार्थ भाव से इंसान को दिया है।

स्वर्ग और पृथ्वी में केवल तू ही प्रेम है, सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रेम परम निर्मल है।

2

हे परमेश्वर! न्याय और ताड़ना के लिये तू जो सत्य व्यक्त करता है, वह सब इंसान को बचाने के लिये है।

तेरे वचन इंसान की प्रकृति को प्रकट करते हैं, मुश्किलें और परीक्षण इंसान की भ्रष्टता को दूर करते हैं।

इंसानों, घटनाओं और चीज़ों की तेरी व्यवस्था हमें सत्य समझाने के लिये है।

फिर भी हम तेरी इच्छा को नहीं समझते, हम धारणाएँ पालते हैं, तेरी व्यवस्थाओं के आगे समर्पित नहीं हो पाते।

हम तेरे न्याय को टालते हैं, हम ज़िद्दी और विद्रोही हैं, हमारे अंदर विवेक की कमी है, तेरे दिल को हमने बुरी तरह से आहत किया है।

तू सदा सहिष्णु और धैर्यवान रहा है, हमारा पोषण और सिंचन कर रहा है, हमारे सुन्न हृदय अब जाग गए हैं।

हे परमेश्वर! तूने हमें बचाने के लिये जी-जान से लगा हुआ है, ज़िंदगी को दांव पर लगा रहा है।

स्वर्ग और पृथ्वी में केवल तू ही प्रेम है, सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रेम परम निर्मल है।

हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तू इंसान के प्रेम के परम योग्य है, हम तुझे सदा प्रेम करेंगे, तेरी गवाही देंगे।

पिछला: 290 परमेश्वर का प्रेम मनुष्य के बीच हमेशा रहता है

अगला: 292 परमेश्वर के प्रेम ने मेरे दिल को पिघला दिया है

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें