807 तुम्हें पतरस का अनुकरण करना चाहिए

1 पतरस का उल्लेख होने पर, लोग उसके बारे में अच्छी बातें कहते नहीं थकते। पतरस बुद्धिमान, प्रतिभासम्पन्न था, बचपन से ही उसके माता-पिता उससे बहुत स्नेह करते थे। फिर भी, वयस्क होने पर, वह उनका शत्रु बन गया, क्योंकि उसने मेरे बारे में ज्ञान तलाशना कभी बंद नहीं किया, परिणामस्वरूप वह अपने माता-पिता से विमुख हो गया। यह इसलिए हुआ क्योंकि, सबसे ज़्यादा उसे यह विश्वास था कि स्वर्ग और पृथ्वी और सभी वस्तुएं सर्वशक्तिमान के हाथों में हैं, और सभी सकारात्मक बातें परमेश्वर से आती हैं, शैतान द्वारा संसाधित हुए बिना उसी से सीधे तौर पर जारी होती हैं। उसके माता-पिता की प्रतिकूलता ने उसे मेरे कृपालु प्रेम एवं दया का और भी ज्ञान दिया, इस प्रकार उसके भीतर मुझे खोजने की इच्छा और तीव्र हो गयी।

2 उसने न केवल मेरे वचनों को खाने और पीने पर ध्यान दिया, बल्कि मेरी इच्छा को समझने पर भी ध्यान दिया, और वह अपने हृदय में हमेशा सतर्क रहा। परिणामस्वरूप वह अपनी आत्मा में हमेशा संवेदनशील बना रहा और इस प्रकार वह अपने हर काम में मेरे हृदय के अनुकूल रहा। उसने खुद को आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करने के लिए अतीत के लोगों की असफलताओं पर निरंतर ध्यान बनाए रखा, क्योंकि वह असफलता के जाल में फंसने से बुरी तरह डरता था। इसी प्रकार, उसने उन लोगों की आस्था और प्रेम को आत्मसात करने पर भी ध्यान दिया जो युगों से परमेश्वर से प्रेम करते आ रहे थे। इस प्रकार से न केवल नकारात्मक पहलू में, बल्कि और भी अधिक महत्वपूर्ण रूप से, सकारात्मक पहलू में उसने अधिक तेज़ी से विकास किया, कुछ इस तरह कि मेरी उपस्थिति में उसका ज्ञान सभी से बढ़कर हो गया।

3 तो, इसकी कल्पना करना कठिन नहीं है कि किस प्रकार से उसने अपना सब कुछ मेरे हाथों में दे दिया, यहाँ तक कि उसने खाने-पीने, कपड़े पहनने, सोने और रहने के निर्णय भी मुझे सौंप दिये, और इनके बजाय मुझे सभी बातों में संतुष्टि प्रदान करने के आधार पर उसने मेरे उपहारों का आनन्द लिया। मैंने उसके अनगिनत परीक्षण लिए, स्वभाविक रूप से उन्होंने उसे अधमरा कर दिया, परन्तु इन सैकड़ों परीक्षणों के मध्य, उसने कभी भी मुझमें अपनी आस्था नहीं खोई या मुझसे मायूस नहीं हुआ। जब मैंने उससे कहा कि मैंने उसे त्याग दिया है, तो भी वह निराश नहीं हुआ और पहले के अभ्यास के सिद्धांतों के अनुसार एवं व्यावहारिक ढंग से मुझे प्रेम करना जारी रखा। मेरे समक्ष उसकी निष्ठा के कारण, और उस पर मेरे आशीषों के कारण, वह हज़ारों सालों के लिए मनुष्यों के लिए एक उदाहरण और आदर्श बना हुआ है। क्या तुम लोगों को उसकी इसी बात का अनुकरण नहीं करना चाहिए?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 6' से रूपांतरित

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