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तुम लोगों को सत्य स्वीकार करने वाला बनना चाहिए

I

अपनी राह चुनो, सत्य को अस्वीकार न करो,

पवित्र आत्मा की ईशनिंदा न करो।

अनजान मत बनो, अहंकारी मत बनो।

पवित्र आत्मा की रहनुमाई पर चलो।

यीशु की वापसी महान उद्धार है

उनके लिए जो काबिल हैं सच्चाई को स्वीकारने के लिये।

यीशु की वापसी है दंड की आज्ञा उनके

लिए जो नाक़ाबिल हैं सच्चाई को स्वीकारने के लिये।

II

सच्चाई की इच्छा करो, सच्चाई की तलाश करो।

यही है एकमात्र तरीका जिससे होगा तुम्हें फ़ायदा।

जिन लोगों ने सुनी है सच्चाई, फिर भी उस पर अपनी नाक है मुरझायी,

वे सब हैं बहुत ही मूर्ख और अज्ञानी।

यीशु की वापसी महान उद्धार है

उनके लिए जो काबिल हैं सच्चाई को स्वीकारने के लिये।

यीशु की वापसी है दंड की आज्ञा उनके

लिए जो नाक़ाबिल हैं सच्चाई को स्वीकारने के लिये।

III

एहतियात से चलो विश्वास की राह पर परमेश्वर की।

जल्दी निष्कर्ष पर न पहुँचो।

लापरवाह और निश्चिंत न बनो परमेश्वर के विश्वास में।

जो करते हैं उस पर विश्वास, उन्हें होना चाहिए श्रद्धामय और विनम्र।

जिन लोगों ने सुनी सच्चाई, फिर भी जल्द पहुँचते हैं निष्कर्ष पर

या निंदा करते हैं सच की, वे हैं अहंकारी, अहंकारी।

यीशु की वापसी महान उद्धार है

उनके लिए जो काबिल हैं सच्चाई को स्वीकारने के लिये।

यीशु की वापसी है दंड की आज्ञा उनके

लिए जो नाक़ाबिल हैं सच्चाई को स्वीकारने के लिये।

यीशु पर विश्वास करने वालों में से

कोई भी नहीं श्राप देने या निंदा करने के लायक।

होना चाहिए तुम लोगों को विवेकशील,

करना चाहिए स्वीकार सच को।

करना चाहिए स्वीकार सच को।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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