612 परमेश्वर की सेवा करने के लिए क्या करने की ज़रूरत है

1 परमेश्वर की सचमुच सेवा करने वाला व्यक्ति वह है जो परमेश्वर के हृदय के करीब है और परमेश्वर के द्वारा उपयोग किए जाने के योग्य है, और जो अपनी धार्मिक धारणाओं को छोड़ पाने में सक्षम है। यदि तुम चाहते हो कि परमेश्वर के वचन को खाने और पीने का कोई असर हो, तो तुम्हें अपनी धार्मिक धारणाओं का त्याग करना होगा। यदि तुम परमेश्वर की सेवा करने की इच्छा रखते हो, तो यह तुम्हारे लिए और भी आवश्यक होगा कि तुम सबसे पहले अपनी धार्मिक धारणाओं का त्याग करो और हर काम में परमेश्वर के वचनों का पालन करो। परमेश्वर की सेवा करने के लिए व्यक्ति में यह सब होना चाहिए। यदि तुममें इस ज्ञान की कमी है, तो जैसे ही तुम परमेश्वर की सेवा करोगे, तुम उसमें रुकावटें और बाधाएँ उत्पन्न करोगे, और यदि तुम अपनी धारणाओं को पकड़े रहोगे, तो तुम निश्चित तौर पर परमेश्वर द्वारा इस तरह चित कर दिए जाओगे कि फिर कभी उठ नहीं पाओगे। उदाहरण के लिए, वर्तमान को देखो : आज के बहुत सारे कथन और कार्य बाइबल के अनुरूप नहीं हैं; और परमेश्वर के द्वारा पूर्व में किए गए कार्य के अनुरूप भी नहीं हैं, और यदि तुममें आज्ञापालन करने की इच्छा नहीं है, तो किसी भी समय तुम्हारा पतन हो सकता है।

2 यदि तुम परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप कार्य करना चाहते हो, तो तुम्हें सबसे पहले अपनी धार्मिक धारणाओं का त्याग करना होगा और अपने विचारों में सुधार करना होगा। बहुत सारी ऐसी बातें कही जाएंगी जो अतीत में कही गई बातों से असंगत होंगी, और यदि अब तुममें आज्ञापालन की इच्छा की कमी है, तो तुम अपने सामने आने वाले मार्ग पर चल नहीं पाओगे। यदि परमेश्वर के कार्य करने का कोई एक तरीका तुम्हारे भीतर जड़ जमा लेता है और तुम उसे कभी छोड़ते नहीं हो, तो यह तरीका तुम्हारी धार्मिक धारणा बन जाएगा। यदि परमेश्वर क्या है, इस सवाल ने तुम्हारे भीतर जड़ जमा ली है तो तुमने सत्य को प्राप्त कर लिया है, और यदि परमेश्वर के वचन और सत्य तुम्हारा जीवन बनने में समर्थ हैं, तो तुम्हारे भीतर परमेश्वर के बारे में कोई धारणाएं नहीं रह जाएंगी। जो व्यक्ति परमेश्वर के बारे में सही ज्ञान रखते हैं उनमें कोई धारणाएँ नहीं होंगी, और वे धर्म सिद्धांत के अनुसार नहीं चलेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जो परमेश्वर के आज के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं' से रूपांतरित

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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