947 परमेश्वर द्वारा सदोम के विनाश में मनुष्यों के लिए चेतावनी

1 सदोम के लोगों द्वारा किए गए तमाम दुष्कर्मों के लिहाज से, परमेश्वर के सेवकों को नुकसान पहुँचाना तो बस उनकी दुष्टता का एक छोटा-सा अंश था, और इससे जो उनकी दुष्ट प्रकृति प्रकट हुई, वह वास्तव में विशाल समुद्र में पानी की एक बूँद से बढ़कर नहीं थी। इसलिए परमेश्वर ने उन्हें आग से नष्ट करने का फैसला किया। परमेश्वर ने नगर को नष्ट करने के लिए बाढ़ का इस्तेमाल नहीं किया, न ही उसने चक्रवात, भूकंप, सुनामी या किसी और तरीके का इस्तेमाल किया। उसने इस शहर के विनाश के लिए आग का प्रयोग किया। इसका अर्थ था नगर का संपूर्ण विनाश, इसका अर्थ था कि नगर पृथ्वी और अस्तित्व से पूरी तरह से लुप्त हो गया था। यहाँ "विनाश" न केवल नगर के आकार और ढाँचे या बाहरी रूप के लुप्त हो जाने को संदर्भित करता है; बल्कि इसका अर्थ यह भी है कि पूरी तरह से मिटा दिए जाने के कारण नगर के भीतर के लोगों की आत्माएँ भी अस्तित्व में नहीं बचीं। सरल शब्दों में कहें तो, नगर से जुड़े सभी लोग, घटनाएँ और चीज़ें नष्ट कर दी गईं। उस नगर के लोगों के लिए कोई अगला जीवन या पुनर्जन्म नहीं होगा; परमेश्वर ने उन्हें अपनी सृष्टि की मानवजाति से हमेशा-हमेशा के लिए मिटा दिया।

2 आग का इस्तेमाल इस स्थान पर पाप के अंत को सूचित करता है, और कि वहाँ पाप पर अंकुश लग गया; यह पाप अस्तित्व में नहीं रहेगा और न ही फैलेगा। इसका अर्थ था कि शैतान की दुष्टता ने अपनी उपजाऊ मिट्टी के साथ-साथ उस कब्रिस्तान को भी खो दिया था, जिसने उसे रहने और जीने के लिए एक स्थान दिया था। परमेश्वर और शैतान के बीच होने वाले युद्ध में परमेश्वर द्वारा आग का इस्तेमाल उसकी विजय की छाप है, जो शैतान पर अंकित की जाती है। मनुष्यों को भ्रष्ट करके और उन्हें निगलकर परमेश्वर का विरोध करने की शैतान की महत्वाकांक्षा में सदोम का विनाश एक बहुत भारी आघात है, और इसी प्रकार यह एक समय पर मानवता के विकास में एक अपमानजनक चिह्न है, जब मनुष्य ने परमेश्वर का मार्गदर्शन ठुकरा दिया था और अपने आपको बुराई के हवाले कर दिया था। इसके अतिरिक्त, यह परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव के सच्चे प्रकाशन का एक अभिलेख है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II' से रूपांतरित

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