754 जो शैतान को बुरी तरह हराते हैं, केवल उन्हीं को प्राप्त करेगा परमेश्वर

1

शैतान हारता है जब मुक्त होते हैं लोग,

न उसका आहार बनते, न निगले जाते, फिर छोड़ दिए जाते हैं।

क्योंकि सच्चे, आज्ञाकारी, दृढ़ विश्वासी,

ईश्वर का भय मानने वाले होते ऐसे लोग।

शैतान से पूरी तरह नाता तोड़ लेते हैं ऐसे लोग।

क्योंकि उसे शर्मिंदा करते, कायर बना देते हैं, पूरी तरह हरा देते हैं ऐसे लोग।

ईश-अनुसरण में रखते आस्था, मानते हैं वे ईश्वर का भय और उसकी आज्ञा,

इसलिए शैतान छोड़ देता उन्हें।

ईश्वर द्वारा ऐसे ही लोग सचमुच प्राप्त किए गए हैं।

यही उसका मकसद है इंसान को बचाने का।

अगर वे चाहते हैं ईश्वर बचाए, हासिल करे उन्हें,

तो लालच और हमलों का सामना करना चाहिए उन्हें।

शैतान की मुश्किलों से गुज़रकर, जो लोग उसे हराते हैं,

वही बचाए जाते हैं ईश्वर द्वारा।

2

जिन्हें ईश्वर ने बचाया है वो उसके इम्तहानों से गुज़रे हैं,

हर तरह से शैतान के लालच, हमलों का शिकार हुए हैं।

जो बचाए जाते हैं, वो ईश्वर की इच्छा, अपेक्षा को समझते हैं,

उसकी योजनाओं को समर्पित होते हैं।

वे ईश्वर का भय मानकर बुराई से दूर रह पाते हैं।

वे ईमानदार और रहमदिल होते हैं, प्यार और नफ़रत में फ़र्क कर पाते हैं।

इंसाफ़ की समझ के साथ, न्यायसंगत होते हैं।

ईश्वर की परवाह करते हैं, उसकी हर चीज़ को संजोते हैं।

ईश्वर द्वारा ऐसे ही लोग सचमुच प्राप्त किए गए हैं।

यही उसका मकसद है इंसान को बचाने का।

अगर वे चाहते हैं ईश्वर बचाए, हासिल करे उन्हें,

तो लालच और हमलों का सामना करना चाहिए उन्हें।

शैतान की मुश्किलों से गुज़रकर, जो लोग उसे हराते हैं,

वही बचाए जाते हैं ईश्वर द्वारा।

3

शैतान उन्हें न बाँधता, न नज़र रखता, न लाँछित करता, न गाली देता है,

मुक्त और आज़ाद होते हैं वो लोग।

अय्यूब की तरह जिसे ईश्वर ने शैतान को सौंपा था,

ताकि वो आज़ादी से रह सके।

ईश्वर द्वारा ऐसे ही लोग सचमुच प्राप्त किए गए हैं।

यही उसका मकसद है इंसान को बचाने का।

अगर वे चाहते हैं ईश्वर बचाए, हासिल करे उन्हें,

तो लालच और हमलों का सामना करना चाहिए उन्हें।

शैतान की मुश्किलों से गुज़रकर, जो लोग उसे हराते हैं,

वही बचाए जाते हैं ईश्वर द्वारा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II' से रूपांतरित

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