805 केवल वही लोग परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो उसे जानते हैं

मज़बूत होती गवाही उनकी जो बनते गवाह परमेश्वर के

क्योंकि टिकी होती है गवाही उनके सच्चे ज्ञान और ईश्वर के लिए तड़प पर।

गवाही परमेश्वर की नहीं देते वो भावों में बहकर,

देते ईश्वर और उसके स्वभाव के अपने ज्ञान से।

1

क्योंकि वे जान गए हैं परमेश्वर को, लगता उन्हें गवाह बनें वो।

वो जान लें ईश्वर को, जो तड़पें जानने को,

जानें उसकी वास्तविकता और मनोहरता को।

जैसे लोगों में भरा प्यार परमेश्वर का, गवाही उनकी नहीं कोई मजबूरी,

यही है असली और मोल है इसका, और है सच्चा महत्त्व इसका।

ना है निष्क्रिय, ना ही खोखला, ना ही है ये बेमतलब-सा।

मज़बूत होती गवाही उनकी जो बनते गवाह परमेश्वर के

क्योंकि टिकी होती है गवाही उनके सच्चे ज्ञान और ईश्वर के लिए तड़प पर।

गवाही परमेश्वर की नहीं देते वो भावों में बहकर,

देते ईश्वर और उसके स्वभाव के अपने ज्ञान से।

2

जो सच्‍चा प्यार करते परमेश्वर से ज़्यादा मोल बस उन्हीं के जीवन का,

वही करते असल में यकीं परमेश्वर में, क्योंकि जीते हैं वो प्रकाश में ईश्वर के।

जी सकते हैं वो ईश्वर के काम की खातिर और ईश्वर के प्रबंधन के लिए।

बेमतलब नहीं रह जाती ज़िंदगी उनकी,

मिल जाता ईश्‍वर का आशीष जीवन में।

नहीं कटती ज़िंदगी उनकी अंधेरे में, रहते हैं वो प्रकाश में।

मज़बूत होती गवाही उनकी जो बनते गवाह परमेश्वर के

क्योंकि टिकी होती है गवाही उनके सच्चे ज्ञान और ईश्वर के लिए तड़प पर।

गवाही परमेश्वर की नहीं देते वो भावों में बहकर,

देते ईश्वर और उसके स्वभाव के अपने ज्ञान से।

नहीं कटती ज़िंदगी उनकी अंधेरे में, रहते हैं वो प्रकाश में।

मज़बूत होती गवाही उनकी जो बनते गवाह परमेश्वर के

क्योंकि टिकी होती है गवाही उनके सच्चे ज्ञान और ईश्वर के लिए तड़प पर।

गवाही परमेश्वर की नहीं देते वो भावों में बहकर,

देते ईश्वर और उसके स्वभाव के अपने ज्ञान से।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग सदैव उसके प्रकाश के भीतर रहेंगे' से रूपांतरित

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